
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने राज्य में जमीन-जायदाद और राजस्व से जुड़े लंबित मामलों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। राजस्व मामलों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि राजस्व वादों का त्वरित, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि भूमि और राजस्व से जुड़े विवाद आम जनता के जीवन, किसानों के हितों और सामाजिक सौहार्द से सीधे जुड़े होते हैं, इसलिए ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि निर्धारित समय सीमा के बाद भी लंबित रहने वाले मामलों में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाए तथा आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
शनिवार को राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों के निस्तारण की प्रगति की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक आधारित व्यवस्था, जवाबदेही और समयबद्ध कार्यप्रणाली के माध्यम से राजस्व न्यायालयों की कार्यक्षमता को और प्रभावी बनाया जाए, ताकि आम नागरिकों को शीघ्र न्याय मिल सके। उन्होंने विशेष रूप से निर्देश दिए कि निर्धारित समय सीमा से अधिक समय से लंबित मामलों का विशेष अभियान चलाकर प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि तहसील और जिला स्तर पर नियमित समीक्षा हो तथा खराब प्रदर्शन करने वाले जिलों की जवाबदेही तय की जाए। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि आम जनता को वास्तविक राहत मिलनी चाहिए।
आरसीसीएमएस पोर्टल के माध्यम से धारा-80 के अंतर्गत लंबित मामलों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। 1 जनवरी 2026 को कुल 85,158 मामले लंबित थे, जिनमें से 77,578 मामलों का निस्तारण किया गया था। वहीं 22 मई 2026 तक लंबित मामलों की संख्या घटकर 38,166 रह गई, जबकि इस अवधि में 29,543 मामलों का निस्तारण किया गया। तीन महीने से अधिक समय से लंबित मामलों की संख्या में भी लगातार कमी आई है। धारा-80 के मामलों में बस्ती, चित्रकूट, अयोध्या, बागपत और कन्नौज का प्रदर्शन बेहतर रहा, जबकि मेरठ, वाराणसी, अमेठी, गौतमबुद्धनगर और हापुड़ का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर पाया गया।
बैठक में यह भी बताया गया कि धारा-34 के अंतर्गत लंबित मामलों की संख्या में भी उल्लेखनीय कमी आई है। 1 जनवरी 2026 को कुल 22,44,466 मामले लंबित थे, जो 22 मई 2026 तक घटकर 10,59,139 रह गए। इस दौरान 5,40,945 मामलों का निस्तारण किया गया। समीक्षा में बरेली, रामपुर, मुरादाबाद, अलीगढ़ और बदायूं का प्रदर्शन बेहतर पाया गया, जबकि गोरखपुर, संतकबीरनगर, प्रतापगढ़, बलिया और देवरिया अपेक्षित प्रगति हासिल नहीं कर सके। मुख्यमंत्री ने इन जिलों में विशेष अभियान चलाकर लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि वरासत से जुड़े मामलों में नागरिकों को अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें और सभी मामलों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। धारा-24 के मामलों की समीक्षा के दौरान बताया गया कि 1 जनवरी 2026 को 1,82,710 मामले लंबित थे, जो 22 मई 2026 तक घटकर 92,915 रह गए। समीक्षा में वाराणसी, कुशीनगर, मैनपुरी, बलरामपुर और हमीरपुर का प्रदर्शन बेहतर पाया गया, जबकि गौतमबुद्धनगर, लखनऊ, प्रतापगढ़, अमेठी और मुजफ्फरनगर अपेक्षित प्रगति नहीं कर सके। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जिन जिलों में प्रगति संतोषजनक नहीं है, वहां वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए।
मुख्यमंत्री ने आगे निर्देश दिए कि राजस्व न्यायालयों में वर्षों से लंबित पुराने मामलों की अलग सूची तैयार की जाए और उनके निस्तारण के लिए विशेष रणनीति बनाई जाए। बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में लंबित मामलों का निर्धारित समय सीमा के भीतर निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व प्रशासन की कार्यशैली ऐसी होनी चाहिए जिससे जनता का विश्वास और मजबूत हो तथा लोगों को न्याय के लिए अनावश्यक प्रतीक्षा न करनी पड़े।
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