

एलायंस टुडे ब्यूरो
नई दिल्ली: पाकिस्तान सीमा पर बढ़ते तनाव और संभावित युद्ध की आशंका को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक असाधारण कदम उठाते हुए सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को व्यापक नागरिक सुरक्षा मॉक ड्रिल आयोजित करने का आदेश दिया है। यह फैसला गृह मंत्रालय के तहत नागरिक सुरक्षा विंग के अतिरिक्त महानिदेशक बी. संदीपकृष्ण द्वारा लिया गया है। उन्होंने बुधवार को सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर निर्देश जारी किए हैं कि देश के 244 संवेदनशील सीमावर्ती और तटीय जिलों में नागरिक सुरक्षा अभ्यास अनिवार्य रूप से आयोजित किया जाए।
सुरक्षा अभ्यास का उद्देश्य: आम नागरिकों की तैयारियों की परख
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य किसी भी आपात स्थिति, विशेषकर हवाई हमले की स्थिति में आम नागरिकों, विद्यार्थियों और संस्थानों की तत्परता और प्रतिक्रिया क्षमता का मूल्यांकन करना है। मॉक ड्रिल के दौरान विभिन्न परिदृश्यों का अभ्यास कराया जाएगा, जिसमें हवाई आक्रमण की चेतावनी देने वाली सायरन प्रणाली की कार्यक्षमता की जांच, नागरिकों को सुरक्षित आश्रय स्थल तक पहुंचाने की रणनीति, ब्लैकआउट की प्रक्रिया (बिजली की आपातकालीन कटौती) और आपदा के समय आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता शामिल हैं।
पूर्वाभ्यास की तैयारी: क्या-क्या किया जाएगा
हवाई हमले की चेतावनी प्रणाली की जांच: सभी जिलों में सायरन सिस्टम को चालू करके परीक्षण किया जाएगा कि वह कितनी दूर तक प्रभावी है और जनता की प्रतिक्रिया क्या होती है।
ब्लैकआउट का अभ्यास: अचानक बिजली गुल करने का अभ्यास कराया जाएगा ताकि रात के समय दुश्मन के विमानों को निशाना साधने में कठिनाई हो।
महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की पहचान छिपाना: महत्वपूर्ण फैक्टरियों, बंदरगाहों, ऊर्जा संयंत्रों आदि की पहचान को छिपाने के लिए उपयुक्त प्रबंधन किया जाएगा, जिससे वे दुश्मन के निशाने पर न आएं।
आम नागरिकों की सुरक्षा योजना: नागरिकों की सुरक्षित निकासी की प्रक्रिया बनाई जाएगी और उसका पूर्वाभ्यास बार-बार किया जाएगा।
शिक्षा और प्रशिक्षण: छात्रों व आम लोगों को बंकर में छिपने, प्राथमिक चिकित्सा देने, आग से बचाव करने और मानसिक रूप से स्थिर रहने का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
गृह मंत्रालय की बैठक: तैयारी की व्यापक समीक्षा
गृह मंत्रालय में इस संबंध में एक अहम बैठक का आयोजन हुआ, जिसमें देशभर के 244 संवेदनशील जिलों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई। यह समीक्षा विशेष रूप से मौजूदा सुरक्षा उपकरणों की कार्यक्षमता, मरम्मत की आवश्यकता, सायरन प्रणाली की स्थिति, ब्लैकआउट के दौरान की जाने वाली कार्रवाई, और आपूर्ति शृंखला की मजबूती पर केंद्रित रही।
अधिकारियों ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे अपने घरों में निम्नलिखित आवश्यक वस्तुएं अवश्य रखें:
- प्राथमिक चिकित्सा किट
- टॉर्च
- मोमबत्तियाँ
- पर्याप्त नकदी
- मोबाइल की बैकअप बैटरियाँ
- रेडियो सेट
यह सलाह संभावित इलेक्ट्रॉनिक विफलता की स्थिति को ध्यान में रखते हुए दी गई है।
इतिहास में पहली बार 54 साल बाद इतना व्यापक मॉक ड्रिल
भारत में इस प्रकार की व्यापक नागरिक मॉक ड्रिल का आयोजन पिछले 54 वर्षों में नहीं हुआ है। पिछली बार ऐसा अभ्यास वर्ष 1971 में किया गया था, जब भारत और पाकिस्तान के बीच पूर्ण युद्ध हुआ था, जो बांग्लादेश की मुक्ति के संघर्ष के कारण दोनों देशों की पूर्वी और पश्चिमी सीमाओं पर लड़ा गया था। उस समय भी नागरिकों को सुरक्षित रखने, जान-माल की रक्षा करने और दुश्मन के हमलों से बचाव के लिए नागरिक सुरक्षा अभ्यास कराए गए थे। अब एक बार फिर, हालात ऐसे बनते दिख रहे हैं कि सरकार को नागरिकों की सुरक्षा के लिए इतने बड़े स्तर पर अभ्यास करने की जरूरत महसूस हुई है।
क्या आम नागरिकों को चिंतित होना चाहिए?
सरकार का मानना है कि यह कदम एहतियाती है और इसका उद्देश्य किसी भी आपात स्थिति में बेहतर तैयारी सुनिश्चित करना है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इतने वर्षों बाद इस प्रकार की कवायद का आदेश बताता है कि सीमाई तनाव गंभीर मोड़ पर पहुँच चुका है। सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि युद्ध जैसी स्थिति आने पर नागरिकों की जान बचाई जा सके और देश की बुनियादी संरचनाओं की सुरक्षा बनी रहे।
