
एलायंस टुडे ब्यूरो
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के जूलॉजी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. परमजीत सिंह (50) को पुलिस ने शुक्रवार रात गिरफ्तार कर लिया। आरोप है कि उन्होंने बीएससी फाइनल ईयर की छात्रा को फोन कर मिलने का दबाव बनाया और दावा किया कि उन्होंने उसके लिए परीक्षा के पेपर लीक करा दिए हैं।
आरोप के अनुसार, प्रोफेसर ने छात्रा से कहा, “डार्लिंग, तुम्हारे लिए पेपर आउट करा दिया है। एग्जाम से पहले घर से आ जाओ, यहां तुम्हें पेपर दे देंगे।”
फोन कटने के बाद छात्रा रिकॉर्डिंग में यह कहते हुए सुनाई देती है कि उसे पेपर नहीं चाहिए और प्रोफेसर उसे दोबारा उत्पीड़न (मोलेस्ट) करने के उद्देश्य से बुला रहे हैं।
बताया गया है कि आरोपी ने 14 और 15 मई की रात छात्रा को कई बार फोन किया। छात्रा ने पूरी बातचीत रिकॉर्ड कर ली, जो बाद में वायरल हो गई।
शुक्रवार को ऑडियो क्लिप सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए और प्रोफेसर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। ऑडियो रिकॉर्डिंग पुलिस को सौंप दी गई।
इसके बाद पुलिस ने देर रात आरोपी प्रोफेसर को विश्वविद्यालय परिसर से हिरासत में ले लिया। शनिवार को उन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा। डॉ. परमजीत सिंह पिछले चार वर्षों से जूलॉजी विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। वह मूल रूप से बिजनौर के निवासी हैं और लखनऊ में पत्नी व दो बेटियों के साथ रहते हैं।
फोन कॉल के दौरान प्रोफेसर ने छात्रा से कहा कि उन्होंने उसके लिए मेन सब्जेक्ट और इलेक्टिव (वैकल्पिक विषय) दोनों के पेपर आउट करा लिए हैं। बातचीत में वह बार-बार छात्रा को मिलने के लिए दबाव बनाते रहे, जबकि छात्रा लगातार मिलने से इनकार करती रही।
पहले ऑडियो में प्रोफेसर छात्रा से उसकी मां की तबीयत पूछते हैं और मदद की पेशकश करते हुए कहते हैं कि KGMU और PGI में उनके जानने वाले डॉक्टर हैं। वह छात्रा को “डार्लिंग” कहकर संबोधित करते हैं और आर्थिक सहायता देने की बात भी कहते हैं। इसके बाद वह दावा करते हैं कि कोर और इलेक्टिव दोनों पेपर उन्होंने छात्रा के लिए आउट करा लिए हैं और उसे मिलने आने के लिए कहते हैं। छात्रा बार-बार बताती है कि उसने पढ़ाई पूरी कर ली है और परीक्षा के बाद मिलने की बात करती है, लेकिन प्रोफेसर चार दिन के अंदर मिलने का दबाव बनाते हैं।
कॉल समाप्त होने के बाद छात्रा कहती सुनाई देती है कि वह नहीं जाएगी और उसे पेपर नहीं चाहिए क्योंकि प्रोफेसर उसे दोबारा उत्पीड़न करने के लिए बुला रहे हैं।
दूसरे ऑडियो में प्रोफेसर छात्रा से कहते हैं कि वह उन्हें डिच न करे और मिलने का समय स्पष्ट बताए। वह दावा करते हैं कि उन्होंने छात्रा के लिए एमएससी और पीएचडी तक के अवसर तैयार कर दिए हैं और विदेश तक पढ़ाई का प्लेटफॉर्म उपलब्ध करा सकते हैं। वह कहते हैं कि वह छात्रा से भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं और केवल उसके लिए ही पेपर आउट कराया है। बातचीत के दौरान वह बार-बार मिलने के लिए दबाव बनाते हैं, जबकि छात्रा घर की परिस्थितियों और परीक्षा का हवाला देती रहती है।
विश्वविद्यालय के प्रवक्ता प्रो. मुकुल श्रीवास्तव ने कहा कि मामले को गंभीरता से लिया गया है और जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जांच पूरी होने के बाद दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। जूलॉजी विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. अमिता कनौजिया ने बताया कि उन्होंने ऑडियो सुना है और आवाज आरोपी प्रोफेसर की प्रतीत होती है।
चीफ प्रॉक्टर प्रो. राकेश द्विवेदी के अनुसार, ऑडियो सामने आने के बाद परीक्षा नियंत्रक की ओर से पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। विशाखा कमेटी के तहत गठित इंटरनल कंप्लेंट कमेटी ने भी जांच शुरू कर दी है। शिकायत में कहा गया है कि 14 और 15 मई 2026 की रात प्रोफेसर और छात्रा के बीच हुई आपत्तिजनक बातचीत की तीन ऑडियो रिकॉर्डिंग मिली हैं, जो परीक्षा की गोपनीयता और छात्रा की गरिमा के खिलाफ गंभीर मामला है। ऑडियो रिकॉर्डिंग पेन ड्राइव के माध्यम से पुलिस को सौंपी गई है।
पुलिस के अनुसार आरोपी के खिलाफ उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अध्यादेश 2024 की धारा 11 व 13(5) तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 74 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोपी को मजिस्ट्रेट के सामने पेश कर न्यायिक हिरासत में भेजा जाएगा।
डॉ. परमजीत सिंह ने वर्ष 2007 में रोहिलखंड विश्वविद्यालय, बरेली से एमएससी की। इसके बाद वह 2019 से 2021 तक लखनऊ स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टॉक्सिकोलॉजी रिसर्च में रिसर्च एसोसिएट रहे। वर्ष 2021 से मार्च 2022 तक चंडीगढ़ के इंस्टीट्यूट ऑफ माइक्रोबियल टेक्नोलॉजी में कार्य किया। 7 जून 2022 से वह लखनऊ विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर तैनात हैं। उनके पिता किसान हैं और परिवार में एक भाई तथा एक विवाहित बहन हैं।
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