
लखनऊ: इस साल राजधानी के मलिहाबाद के मशहूर आम (Mango) के बागानों पर मौसम की मार साफ दिखाई दे रही है। आम (Mango) के फल सामान्य से छोटे हैं, बड़ी संख्या में समय से पहले गिर रहे हैं और किसानों का कहना है कि कुल उत्पादन में भारी गिरावट आई है। किसानों और वैज्ञानिकों के मुताबिक इसकी सबसे बड़ी वजह तेजी से बदलता मौसम है, जिसने आम (Mango) की खेती के लिए जरूरी मौसम चक्र को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है।
भारत की “मैंगो कैपिटल” कहे जाने वाले मलिहाबाद का आम (Mango) की दुनिया में वही महत्व है, जो चाय के लिए दार्जिलिंग और केसर के लिए कश्मीर का है। यहां का प्रसिद्ध दशहरी आम (Mango) भारत की आम (Mango) उत्पादन कहानी का अहम हिस्सा है। भारत दुनिया के कुल आम (Mango) उत्पादन का लगभग 40 से 45 प्रतिशत हिस्सा पैदा करता है और इसमें मलिहाबाद के दशहरी आम (Mango) की बड़ी भूमिका होती है। हजारों किसान परिवार, व्यापारी, पैकर्स, ट्रांसपोर्टर और निर्यातक इस फसल पर निर्भर हैं।
लेकिन इस वर्ष बेमौसम ठंड, अस्थिर तापमान और फूल आने की प्रक्रिया में गड़बड़ी ने फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है। किसानों का कहना है कि पिछले चार दशकों में उत्पादन 40 से 60 प्रतिशत तक घट गया है।
अमलौली गांव के किसान राजकुमार सिंह कहते हैं, “करीब 40 साल पहले हमारे बागों में खूब आम (Mango) होते थे, लेकिन अब उत्पादन लगभग आधा रह गया है।”
नबीपनाह गांव के किसान बजरंग शरण शर्मा के लिए आम (Mango) की खेती पीढ़ियों से चली आ रही विरासत है। वे बताते हैं, “जब हम छोटे थे, तब आम (Mango) के पेड़ों में बीमारियां बहुत कम होती थीं और दवाइयों का छिड़काव भी लगभग नहीं करना पड़ता था। लेकिन पिछले 25 से 30 वर्षों में पैदावार लगातार गिरती गई है।”
स्थिति को और खराब यह कर रहा है कि किसान अब महंगे कीटनाशकों पर निर्भर होते जा रहे हैं, जिनमें से कई नकली या बेअसर होने का संदेह है। शर्मा का कहना है कि इस साल दवाइयों पर होने वाला खर्च शायद आम (Mango) की बिक्री से होने वाली कमाई से भी ज्यादा हो जाए।
वैज्ञानिकों के अनुसार, आम (Mango) के पेड़ों को सफल उत्पादन के लिए लगभग आठ महीने का संतुलित मौसम चक्र चाहिए होता है। इसमें सर्दियों की ठंड, वसंत ऋतु में परागण और गर्मियों की तेज धूप शामिल है, जो आम (Mango) को मिठास, खुशबू और रंग देती है। मौसम में केवल एक महीने की असामान्यता भी उत्पादन और गुणवत्ता दोनों को बुरी तरह प्रभावित कर सकती है।
केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान (CISH) के निदेशक डॉ. टी. दामोदरन के अनुसार सफल परागण के लिए कम से कम 15 दिनों तक स्थिर तापमान जरूरी होता है। इस वर्ष केवल शुरुआती फूलों को अनुकूल मौसम मिला, जबकि बाद में अचानक तापमान गिरने से मलिहाबाद के बड़े हिस्से में फल बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो गई।
मलिहाबाद की आम (Mango) विरासत के सबसे बड़े संरक्षकों में शामिल 85 वर्षीय पद्मश्री सम्मानित कलीमुल्लाह खान, जिन्हें दुनिया “मैंगो मैन” के नाम से जानती है, भी बदलते मौसम को लेकर चिंतित हैं। वे बताते हैं, “हमारे बचपन में आम (Mango) 13 मई तक पक जाते थे, लेकिन अब 25 मई के आसपास पकते हैं। इस साल फसल में देरी हुई और ठंड ने फूलों को जला दिया।”
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि अत्यधिक कीटनाशक उपयोग से लाभकारी कीट मर जाते हैं, पेड़ कमजोर हो जाते हैं और बागों की उम्र कम हो जाती है। इससे बचाव के लिए वैज्ञानिक “बैगिंग तकनीक” को बढ़ावा दे रहे हैं, जिसमें छोटे फलों को विशेष कागज के बैग से ढक दिया जाता है। इससे कीटों से सुरक्षा मिलती है और बार-बार रासायनिक छिड़काव की जरूरत कम हो जाती है।
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