

हिंदू धर्म में सप्ताह के प्रत्येक दिन का एक विशेष ग्रह और देवता से संबंध होता है। बृहस्पतिवार, जिसे ‘गुरुवार’ भी कहा जाता है, देवगुरु बृहस्पति को समर्पित होता है। यह दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु और बृहस्पति देव की पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। बृहस्पति देव को ज्ञान, धर्म, नीति, गुरुता, और शुभता का प्रतीक माना जाता है।बृहस्पति देव देवताओं के गुरु माने जाते हैं और नवग्रहों में प्रमुख स्थान रखते हैं। ये न्यायप्रिय, सद्गुणों से युक्त, और ज्ञान के दाता हैं। इनका वाहन हाथी होता है और इन्हें पीले वस्त्र, पीला चंदन, और पीली चीज़ें अर्पित की जाती हैं।
गुरुवार व्रत करने से लाभ:
धन, सुख और समृद्धि में वृद्धि होती है। शिक्षा, ज्ञान और विद्या प्राप्ति में सहायता मिलती है। गुरु दोष या बृहस्पति ग्रह की अशुभता दूर होती है। वैवाहिक जीवन सुखद होता है और अच्छे रिश्तों की प्राप्ति होती है। आध्यात्मिक उन्नति होती है और मन शांत रहता है।
गुरुवार व्रत पूजा विधि:
प्रातः स्नान कर स्वच्छ पीले वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को स्वच्छ कर वहां भगवान विष्णु या बृहस्पति देव की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। पीला चंदन, हल्दी, चने की दाल, पीले पुष्प, गुड़ और केले चढ़ाएं। “ॐ बृं बृहस्पतये नमः” मंत्र का जाप 108 बार करें। गुरुवार व्रत कथा का श्रवण या पाठ करें। व्रतधारी दिनभर उपवास रख सकते हैं और शाम को फलाहार करें और इस दिन नमक का सेवन नहीं करना चाहिए। गुरुवार को पीले वस्त्र दान करना, गरीबों को चना-दाल, केले और पीली मिठाइयाँ देना पुण्यकारी होता है।
पुराणों में एक कथा प्रसिद्ध है जिसमें एक ब्राह्मणी गरीबी से परेशान होकर बृहस्पतिवार का व्रत करती है। लेकिन उसकी सास और पति उसे व्रत में बाधा पहुँचाते हैं। फिर भी वह श्रद्धा से व्रत करती रहती है। परिणामस्वरूप उसके घर में धन-धान्य की वर्षा होती है और पूरा परिवार सुखी हो जाता है। यह कथा व्रत की शक्ति और विश्वास का प्रतीक मानी जाती है।
गुरुवार को क्या न करें:
बाल कटवाना या दाढ़ी बनवाना।
झाड़ू-पोंछा नहीं लगाना।
कपड़े नहीं धोना।
व्रत के दिन नमक या तामसिक भोजन नहीं करना।
