

एलायंस टुडे ब्यूरो
सिरोही: किसान यदि समय पर अपने खेत की मिट्टी की जांच करवाएं, तो वे बेहतर फसल उत्पादन के साथ-साथ उर्वरकों पर होने वाले खर्च में भी काफी बचत कर सकते हैं। इससे न केवल उनकी आय बढ़ेगी, बल्कि पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा। किसानों को इसी दिशा में लाभ पहुंचाने के लिए कृषि विभाग ने मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना शुरू की है। इस योजना के अंतर्गत जिले के 10,000 किसानों की मिट्टी का मुफ्त परीक्षण किया जाएगा और उन्हें मृदा स्वास्थ्य कार्ड भी वितरित किया जाएगा। इस योजना के तहत खेतों से मिट्टी के नमूनों का संग्रहण कृषि पर्यवेक्षकों के माध्यम से किया जाएगा और उनका परीक्षण जिले की मृदा प्रयोगशाला में किया जाएगा। सामान्यतः एक नमूने के लिए 5 रुपये शुल्क लिया जाता है, लेकिन इस केंद्र प्रायोजित योजना के अंतर्गत यह सेवा पूरी तरह निशुल्क है।
मृदा स्वास्थ्य कार्ड के लाभ
मृदा स्वास्थ्य कार्ड एक प्रकार का खेत का रिपोर्ट कार्ड होता है, जिसमें यह दर्शाया जाता है कि मिट्टी में कौन-कौन से पोषक तत्वों की कमी है और किस तरह की भौतिक समस्याएं मौजूद हैं, जैसे लवणता या क्षारीयता। इसके साथ ही यह भी बताया जाता है कि किस फसल के लिए किस उर्वरक की कितनी मात्रा का उपयोग करना उपयुक्त होगा। इस कार्ड के अनुसार उर्वरकों के संतुलित उपयोग से अत्यधिक यूरिया और डीएपी जैसी रासायनिक खादों का प्रयोग घटता है। जैविक खाद जैसे गोबर की खाद और रासायनिक खादों के संयोजन से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और खेती की लागत घटती है। मिट्टी का नमूना फसल की बुवाई से एक महीने पहले लेना सबसे उपयुक्त रहता है। साल में एक या दो बार मिट्टी की जांच अवश्य करानी चाहिए।
सामान्य खेतों के लिए तरीका:
खेत के 8-10 स्थानों को चिह्नित करें।
ऊपर की घास और मलबा हटाकर लगभग 15 सेंटीमीटर (आधा फुट) गहराई से मिट्टी काटें।
सभी स्थानों की मिट्टी एक टब में इकट्ठा करें और अच्छी तरह मिला लें।
मिट्टी को चार भागों में बांटें, फिर दो भाग फेंक दें। शेष मिट्टी को फिर चार भाग में बांटकर दो भाग फिर से हटा दें।
इस प्रक्रिया को दोहराते हुए लगभग 500 ग्राम मिट्टी बचाएं।
इस नमूने को साफ थैली में भरें और उसमें एक पर्ची डालें जिसमें किसान का नाम, पिता का नाम, गांव, तहसील, जिला, खेत का खसरा नम्बर, और भूमि सिंचित है या नहीं यह सब लिखा हो।
फलदार पौधों या बगीचे के लिए:
10-15 प्रतिनिधि पौधे चुनें।
पौधे के तने से 1-2 फुट की दूरी पर चारों दिशाओं से 0-15 और 15-30 सेंटीमीटर की गहराई से मिट्टी लें।
दोनों गहराइयों की मिट्टी अलग-अलग मिलाकर दो नमूने तैयार करें।
नए बगीचे के लिए 0-15 से लेकर 120-150 सेंटीमीटर तक विभिन्न गहराइयों से नमूने लिए जाएं।
किन स्थानों से मिट्टी का नमूना न लें:
खेत की ऊंची-नीची जगह से
मेढ़ या पानी की नाली के पास से
पेड़ों की छाया में या कम्पोस्ट के ढेर के पास से
हाल ही में उर्वरक डाले गए खेत से
खड़ी फसल वाले खेत से
ध्यान रखें: मिट्टी का नमूना खाद के बोरे या थैली में नहीं रखना चाहिए।
