
एलायंस टुडे ब्यूरो
लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के बिजली कर्मियों से अपील की है कि वे त्योहारों के मद्देनजर अगले दो माह तक बिजली आपूर्ति और उपभोक्ताओं सेवाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। संघर्ष समिति ने कहा है कि निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन में हम शुरू से ही किसानों और उपभोक्ताओं को साथ लेकर चल रहे हैं। त्योहारों में उन्हें कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। अगले दो माह पितृ पक्ष, नवरात्र, रामलीला, दशहरा, दीपावली और छठ जैसे अति महत्वपूर्ण पर्व हैं।
इस बीच संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के बैनर तले आज लगातार 283 वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
संघर्ष समिति ने आज सप्ताहांत में पावर कार्पोरेशन प्रबंधन से निजीकरण पर पांच प्रश्न पूछे हैं। पहला प्रश्न है कि ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने यूपी ट्रांस्को को स्टेट ट्रांसमिशन कंपनी ऑफ द ईयर का पुरस्कार मिलने पर इसे प्रदेश का गौरव बताया है जो उचित ही है । तो सवाल यह है कि जब सरकारी क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की ट्रांसमिशन बिजली व्यवस्था देश में श्रेष्ठतम हो गई है तब पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम व दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम में लगातार हो रहे सुधार के बाद भी इनका निजीकरण क्यों किया जा रहा है ? ट्रांसमिशन की तरह वितरण कंपनियां भी लगातार सुधार कर रही हैं, ऐसे में इनका निजीकरण क्यों हो रहा है।
दूसरा प्रश्न है कि अगर घाटे के नाम पर निजीकरण किया जा रहा है तो चंडीगढ़ और दादरा नगर हवेली दमन व दीव जहां एटी एंड सी हानियां क्रमशः तीन प्रतिशत और 8% थी और इन दोनों स्थानों पर बिजली विभाग मुनाफे में था तो दादरा नगर हवेली दमन व दीव और चंडीगढ़ का बिजली का निजीकरण क्यों किया गया ?
तीसरा प्रश्न है कि दिल्ली में निजीकरण के 23 साल बाद भी दिल्ली विद्युत बोर्ड के कर्मचारियों को पेंशन देने के लिए उपभोक्ताओं के बिजली बिल में निजी कंपनियां 7% की दर से पेंशन का सरचार्ज वसूलती है तो सवाल है कि निजीकरण के बाद उत्तर प्रदेश में पेंशन देने के एवज में निजी कंपनियां उपभोक्ताओं से कितने प्रतिशत सरचार्ज वसूलेंगी ? चौथा प्रश्न है कि निजीकरण के बाद बिजली कनेक्शन देने के लिए क्या निजी कंपनियों को उपभोक्ताओं से मनमाना बिल वसूलने का अधिकार मिल जाएगा ? उदाहरण के तौर पर 12 फरवरी 2025 को आगरा में टोरेंट पावर के एक बिल की कॉपी संलग्न की जा रही है जिसमें 2 किलो वाट का कनेक्शन देने के लिए उपभोक्ता से 9 लख रुपए वसूल गया है । उपभोक्ता द्वारा 9 लाख रुपए के भुगतान की रसीद भी संलग्न है। ऐसे अनेक उदाहरण हैं। क्या निजीकरण के बाद उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल और दक्षिणांचल की गरीब जनता के साथ यही होने जा रहा है ?
पांचवा प्रश्न यह है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम व दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण होने के बाद गरीब किसानों, बुनकरों और गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले उपभोक्ताओं को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सब्सिडी दी जाएगी या नहीं ? उदाहरण के तौर पर ग्रेटर नोएडा में निजीकरण के 32 साल बाद भी किसानों को सब्सिडी नहीं मिलती जबकि पूरे प्रदेश में किसानों को मुफ्त बिजली दी जा रही।
संघर्ष समिति ने कहा कि निजीकरण के बाद उपभोक्ताओं और कर्मचारियों को होने वाली दिक्कतों के बारे में प्रत्येक सप्ताहांत संघर्ष समिति पांच-पांच प्रश्न पूछेगी।
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डीके मिश्रा के आकस्मिक निधन पर शोक
राज्य विद्युत परिषद प्राविधिक कर्मचारी संघ के पूर्व अध्यक्ष डीके मिश्रा के आकस्मिक निधन पर आज सभी जनपदों में बिजली कर्मचारियों ने सभा में 2 मिनट का मौन रखकर स्वर्गीय डीके मिश्रा के प्रति श्रद्धा सुमन अर्पित किए।