
एलायंस टुडे ब्यूरो
मुंबई: हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता और बॉलीवुड के “ही-मैन” कहे जाने वाले धर्मेंद्र का निधन हो गया है। बता दें की सोमवार दोपहर अचानक उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ने की खबर आई थी. करीब सात दशक लंबे फिल्मी करियर में उन्होंने 300 से अधिक फिल्मों में काम किया और दर्शकों के दिलों पर राज किया।
धर्मेंद्र ने 1960 में “दिल भी तेरा हम भी तेरे” से फिल्मी सफर की शुरुआत की थी। शुरुआती दौर में मिलन की बेला, फूल और पत्थर, और आए दिन बहार के जैसी फिल्मों से उन्होंने अपनी खास पहचान बनाई। इसके बाद 60, 70 और 80 के दशक में धर्मेंद्र ने हिंदी सिनेमा को एक से बढ़कर एक सुपरहिट फिल्में दीं — आंखें, शिकार, मेरा गांव मेरा देश, राजा जानी, सीता और गीता, जुगनू, यादों की बारात, दोस्त, शोले, धरम वीर, गुलामी, हुकूमत, आग ही आग और तहलका जैसी फिल्मों ने उन्हें अमर बना दिया।
धर्मेंद्र सिर्फ एक्शन हीरो नहीं थे, बल्कि रोमांस, कॉमेडी और इमोशन—हर रंग में ढल जाने वाले कलाकार थे। शोले में वीरू का उनका किरदार आज भी दर्शकों के दिलों में जिंदा है।
90 के दशक के बाद उन्होंने कई यादगार चरित्र भूमिकाओं से दर्शकों का दिल जीता — प्यार किया तो डरना क्या, लाइफ इन ए मेट्रो, अपने, जॉनी गद्दार, यमला पगला दीवाना जैसी फिल्मों में उनका अभिनय सराहा गया। हाल के वर्षों में वे रॉकी और रानी की प्रेम कहानी तथा तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया में नजर आए।
साल 1997 में धर्मेंद्र को फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। अभिनय के साथ उन्होंने राजनीति में भी कदम रखा और भारतीय जनता पार्टी से बीकानेर (राजस्थान) लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।
पर्सनल लाइफ में धर्मेंद्र ने दो शादियाँ कीं — पहली पत्नी प्रकाश कौर से उनके चार बच्चे हुए, जिनमें सनी देओल और बॉबी देओल आज बॉलीवुड के बड़े सितारे हैं। दूसरी पत्नी हेमा मालिनी से उनकी दो बेटियाँ हैं — ईशा देओल और अहाना देओल।
धर्मेंद्र के निधन से फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है। एक ऐसा कलाकार जिसने दशकों तक लोगों का मनोरंजन किया, अब केवल पर्दे की यादों में रह जाएगा।
सिनेमा का “ही-मैन” चला गया, लेकिन उसकी वीरता और मुस्कान हमेशा जीवित रहेगी।
