
एलायंस टुडे ब्यूरो
मुंबई: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने बुधवार को मौद्रिक नीति समिति (MPC) की द्विमासिक बैठक के बाद अपनी प्रमुख उधार दर (रेपो रेट) को 5.5% पर स्थिर बनाए रखने का फैसला किया। यह फैसला तीन दिवसीय बैठक के समापन पर आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा द्वारा घोषित किया गया, जिसमें उन्होंने मुद्रास्फीति, आर्थिक वृद्धि और अमेरिका द्वारा लगाए गए नए टैरिफ जैसे वैश्विक व्यापार तनावों पर चर्चा की। यह गवर्नर मल्होत्रा का चौथा मौद्रिक नीति संबोधन था, जिसमें उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति और वैश्विक परिवर्तनों से उस पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को विस्तार से समझाया।
रेपो रेट यथावत, मौद्रिक नीति रुख ‘तटस्थ’ बना रहेगा
गवर्नर मल्होत्रा ने बताया कि एमपीसी ने सर्वसम्मति से पॉलिसी रेपो रेट को 5.5% पर बनाए रखने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) को 5.25% और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) तथा बैंक रेट को 5.75% पर स्थिर रखा गया है। उन्होंने कहा, “4, 5 और 6 अगस्त को हुई बैठक में व्यापक आर्थिक परिस्थितियों और वित्तीय संकेतकों की गहन समीक्षा के बाद, समिति ने पॉलिसी रेपो रेट को अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया है। हम घरेलू और वैश्विक परिस्थितियों में हो रहे बदलावों पर पैनी नजर बनाए रखेंगे और उसी के अनुसार मौद्रिक नीति का मार्ग तय करेंगे।”
वैश्विक व्यापार तनाव से विकास पर खतरा
गवर्नर मल्होत्रा के भाषण का मुख्य आकर्षण वैश्विक व्यापार तनावों को लेकर उनकी चिंता रही। उन्होंने अमेरिका द्वारा हाल ही में घोषित टैरिफ और चल रही व्यापार वार्ताओं का जिक्र करते हुए कहा कि इससे भारत की विकास दर प्रभावित हो सकती है। “बाहरी मांग की संभावनाएं अनिश्चित बनी हुई हैं। दीर्घकालिक भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक अस्थिरता और वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव हमारे विकास पूर्वानुमानों के लिए जोखिम पैदा कर रहे हैं,” उन्होंने कहा।उन्होंने स्पष्ट किया कि हालांकि भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था मजबूत है, लेकिन वैश्विक व्यापार से जुड़े मुद्दे नई चुनौतियाँ ला सकते हैं।
आर्थिक वृद्धि का अनुमान 6.5% पर बरकरार
RBI ने 2025–26 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर का अनुमान 6.5% पर स्थिर रखा है। तिमाही अनुमान के अनुसार, Q1 में 6.5%, Q2 में 6.7%, Q3 में 6.6% और Q4 में 6.3% की वृद्धि की उम्मीद जताई गई है। वहीं, 2026–27 की पहली तिमाही के लिए 6.6% की वृद्धि दर का अनुमान है। गवर्नर ने कहा, “सामान्य से बेहतर मानसून, घटती महंगाई, उत्पादन क्षमता में बढ़ोतरी और अनुकूल वित्तीय स्थितियाँ घरेलू मांग को सहारा दे रही हैं। सरकार की पूंजीगत व्यय नीति, मौद्रिक और नियामकीय समर्थन भी मांग को बल देंगे।” उन्होंने यह भी बताया कि आने वाले महीनों में निर्माण और व्यापार क्षेत्र सेवा क्षेत्र की वृद्धि को आगे बढ़ा सकते हैं। गवर्नर ने कहा कि हेडलाइन मुद्रास्फीति में तेज गिरावट आई है, जिससे फिलहाल दरों में और कटौती की जरूरत नहीं है। हालांकि, खाद्य कीमतों, विशेष रूप से सब्जियों में अस्थिरता बनी हुई है। “मुद्रास्फीति अब पहले के अनुमान से काफी कम है। कोर महंगाई लगभग 4% के आसपास स्थिर बनी हुई है। हालांकि, मौजूदा वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही से मुद्रास्फीति में फिर से बढ़ोतरी हो सकती है,” उन्होंने कहा। उन्होंने यह भी बताया कि फरवरी 2025 से अब तक 100 बेसिस प्वाइंट की कटौती की गई है और इसका असर अब भी अर्थव्यवस्था में देखा जा रहा है।
वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बनी हुई
गवर्नर ने अपने संबोधन में वैश्विक आर्थिक परिदृश्य पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राजनीतिक अस्थिरता में कुछ हद तक कमी आई है, लेकिन वैश्विक व्यापार की चुनौतियाँ अभी भी बरकरार हैं। “विश्व स्तर पर, नीतिगत निर्माताओं को धीमी वृद्धि और चिपकी हुई मुद्रास्फीति की दोहरी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। कुछ विकसित देशों में मुद्रास्फीति फिर से बढ़ रही है,” उन्होंने कहा। उन्होंने आगे कहा, “नई वैश्विक व्यवस्था के उभरने के बीच भारत मजबूत आर्थिक आधार, पर्याप्त विदेशी भंडार और नीतिगत स्थिरता के चलते उज्ज्वल संभावनाएं रखता है।”
