
-Raksha Bandhan 2025: तारीख और समय
एलायंस टुडे ब्यूरो
नई दिल्ली। हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) भारत का एक प्रमुख और भावनात्मक त्योहार है, जो भाई-बहन के प्रेम, स्नेह और विश्वास का प्रतीक माना जाता है। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी लंबी उम्र, सफलता और सुरक्षा की कामना करती हैं, वहीं भाई भी अपनी बहन को जीवन भर उसकी रक्षा का वचन देता है।
Raksha Bandhan 2025 कब है
इस वर्ष Raksha Bandhan 2025 का पर्व 9 अगस्त (शनिवार) को पूरे देश में श्रद्धा और हर्षोल्लास से मनाया जाएगा।
पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 8 अगस्त 2025 को दोपहर 2:12 बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त: 9 अगस्त 2025 को दोपहर 1:24 बजे
उदयातिथि (सूर्योदय के समय पूर्णिमा) के कारण रक्षाबंधन 9 अगस्त को ही मनाया जाएगा। इस बार विशेष बात यह है कि भद्रा काल नहीं होगा, जिससे पूरे दिन राखी बांधना शुभ और मंगलकारी रहेगा।
Raksha Bandhan पर राखी बांधते समय बोला जाने वाला विशेष रक्षा मंत्र
रक्षा बंधन पर राखी बांधने की परंपरा केवल एक रस्म नहीं है, यह एक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक बंधन है। इस दौरान एक पवित्र संस्कृत मंत्र बोला जाता है, जिसे रक्षा मंत्र कहा जाता है। यह मंत्र भाई की दीर्घायु, सुरक्षा और समृद्धि की कामना के लिए उच्चारित किया जाता है।
रक्षा बंधन का मंत्र (Raksha Bandhan Mantra):
ॐ येन बद्धो बलि राजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥
मंत्र का अर्थ:
“जिस रक्षा सूत्र से महान पराक्रमी दैत्यराज बलि को बांधा गया था, उसी सूत्र से मैं तुम्हें बांधती हूं। यह रक्षा सूत्र तुम्हारी रक्षा करे, और तुम अडिग रहो।” यह मंत्र राखी बांधने के समय बोला जाता है और यह परंपरा इस पर्व को धार्मिक गहराई और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करती है।
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Raksha Bandhan 2025: राखी बांधने की पारंपरिक विधि
राखी बांधते समय बहन द्वारा यह परंपरा निभाई जाती है:
भाई को उत्तर या पूर्व दिशा की ओर बैठाया जाता है।
बहन सबसे पहले भाई की आरती करती है।
फिर तिलक लगाकर मिठाई खिलाती है।
इसके बाद वह भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बांधते हुए रक्षा मंत्र का उच्चारण करती है।
भाई उपहार या नकद राशि देकर बहन को आशीर्वाद देता है और उसकी जीवन भर रक्षा करने का संकल्प लेता है।
Raksha Bandhan 2025 का महत्व
यह पर्व सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि भारतीय परिवार व्यवस्था और संस्कृति का जीवंत प्रतीक है।
यह भाई-बहन के बीच स्नेह, विश्वास और जिम्मेदारी को याद दिलाने वाला दिन है।
रक्षा मंत्र के साथ बांधी गई राखी केवल एक धागा नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक कवच है।
