
एलायंस टुडे ब्यूरो
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बिजली वितरण कंपनियों के निजीकरण के विरोध में प्रदेशभर में लगातार 268वें दिन भी व्यापक प्रदर्शन जारी रहा। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोसिएशन की गतिविधियों पर गंभीर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हस्तक्षेप की मांग की है। समिति का आरोप है कि यह एसोसिएशन पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण को बढ़ावा दे रही है और निजी कंपनियों के हित साधने में लगी हुई है।
संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि नवंबर 2024 में लखनऊ में हुई विद्युत वितरण कंपनियों की बैठक में ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोसिएशन का गठन निजी घरानों की मिलीभगत से किया गया। समिति का कहना है कि इस एसोसिएशन में सरकारी और निजी कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ बड़े निजी घरानों के सीईओ शामिल हैं।
संघर्ष समिति ने विशेष रूप से उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के मौजूदा अध्यक्ष डॉ. आशीष गोयल पर सवाल उठाए हैं। समिति का कहना है कि डॉ. गोयल पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष रहते हुए इस एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी हैं, जो सरकारी गोपनीयता और हितों के टकराव का मामला है। समिति ने मांग की है कि डॉ. गोयल को या तो इस एसोसिएशन से तत्काल इस्तीफा देना चाहिए या फिर पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष पद से हट जाना चाहिए।
समिति ने यह भी आरोप लगाया कि एसोसिएशन देशभर के विद्युत वितरण निगमों से करोड़ों रुपये का चंदा ले रही है और इसके कोषाध्यक्ष के पद पर एक निजी कंपनी का सीईओ है। समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन ने भी इस संगठन को करोड़ों रुपये का चंदा दिया है, जिसकी पारदर्शिता संदिग्ध है। संघर्ष समिति ने मांग की कि इस संगठन की वैधता, उद्देश्य, फंडिंग और खर्च का ऑडिट कैग से कराया जाए।
इसके अलावा समिति ने यह भी आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के पूर्व अध्यक्ष एवं भारत सरकार के पूर्व विद्युत सचिव आलोक कुमार, जो वर्तमान में इस एसोसिएशन के डायरेक्टर जनरल हैं, कॉरपोरेशन के वरिष्ठ अधिकारियों की अनौपचारिक बैठकें लेकर निजीकरण प्रक्रिया को तेज करने के लिए दबाव बना रहे हैं। समिति ने इसे गंभीर मामला बताते हुए इसकी उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
संघर्ष समिति ने कहा कि निजीकरण को लेकर हताश पूर्व और वर्तमान अधिकारी निजी कंपनियों के साथ मिलकर संविधानेतर गतिविधियां कर रहे हैं, जो पूरी तरह से अनैतिक है।
संघर्ष समिति के आह्वान पर आज वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, मुरादाबाद, हरदुआगंज, जवाहरपुर, परीक्षा, पनकी, ओबरा, पिपरी और अनपरा समेत पूरे प्रदेश में बिजली कर्मियों ने प्रदर्शन किया। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि निजीकरण की प्रक्रिया नहीं रोकी गई, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
