
नई दिल्ली: भारत की अग्रणी ई-गवर्नेंस कंपनी प्रोटीन ईगॉव टेक्नोलॉजीज लिमिटेड को सोमवार को एक बड़ा झटका लगा, जब कंपनी ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की कि उसे आयकर विभाग की महत्वाकांक्षी ‘पैन 2.0 परियोजना’ के लिए शॉर्टलिस्ट नहीं किया गया है। इस खबर के सामने आते ही कंपनी के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई, और BSE व NSE दोनों पर इसके स्टॉक्स 20% के लोअर सर्किट पर पहुंच गए।
क्या है पैन 2.0 प्रोजेक्ट?
‘पैन 2.0’ आयकर विभाग की एक महत्त्वाकांक्षी परियोजना है, जिसका उद्देश्य देश में पैन और टैन सेवाओं को तकनीकी रूप से अधिक उन्नत, तेज और नागरिक-अनुकूल बनाना है। यह परियोजना मौजूदा प्रणाली को पूरी तरह से बदलकर एक नया डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। कैबिनेट की आर्थिक मामलों की समिति (CCEA) ने इस परियोजना को नवंबर 2024 में स्वीकृति दी थी, जिसके लिए ₹1,435 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया था।
प्रोटीन की प्रतिक्रिया और निवेशकों की चिंता
कंपनी ने एक रेगुलेटरी फाइलिंग के ज़रिए बताया कि वह पैन 2.0 की अगली चरण की प्रक्रिया में शामिल नहीं है। हालांकि, कंपनी ने स्पष्ट किया कि उसका मौजूदा पैन सेवा अनुबंध पूर्ववत जारी रहेगा और इसमें कोई बदलाव नहीं होगा। इसके बावजूद, निवेशकों ने इस खबर को भविष्य के राजस्व और ग्रोथ संभावनाओं के लिए खतरे की घंटी माना, और भारी मात्रा में शेयरों की बिकवाली देखने को मिली।
ब्रोकरेज हाउस का अलर्ट: राजस्व में गिरावट का खतरा
प्रमुख ब्रोकरेज फर्म इक्विरस (Equirus) ने प्रोटीन की रेटिंग को ‘Add’ से घटाकर ‘Sell’ कर दिया है और इसका टारगेट प्राइस भी ₹1,730 से घटाकर ₹900 कर दिया गया है। रिपोर्ट में बताया गया कि पैन सेवाएं कंपनी के कुल राजस्व का लगभग 50% योगदान देती हैं। यदि पैन 2.0 प्रोजेक्ट नहीं मिला, तो FY27 तक कंपनी के कुल राजस्व में 35% तक की गिरावट देखी जा सकती है। FY26 तक असर सीमित रहेगा, लेकिन दीर्घकालीन दृष्टिकोण से कंपनी की आय में 75–100% तक गिरावट हो सकती है।
क्या करती है प्रोटीन ईगॉव?
1. पैन कार्ड सेवाएं:
कंपनी भारत में पैन कार्ड जारी करने, री-इश्यू, अपडेट व वेरिफिकेशन की सेवाएं देती है। इसका मार्केट शेयर लगभग 64% है।
2. पेंशन सेवाएं (CRA):
प्रोटीन भारत की नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और अटल पेंशन योजना (APY) के लिए सेंट्रल रिकॉर्डकीपिंग एजेंसी है, जिसमें इसका मार्केट शेयर 97% से अधिक है।
3. डिजिटल पहचान सेवाएं:
इसमें आधार ऑथेंटिकेशन, ई-केवाईसी, ई-साइन और ऑनलाइन पैन वेरिफिकेशन शामिल हैं।
4. ओपन डिजिटल इकोसिस्टम प्रोजेक्ट्स:
जैसे कि ONDC (ई-कॉमर्स), OneSt (स्टार्टअप प्लेटफॉर्म), Agristack (कृषि तकनीक) इत्यादि।
आगे क्या?
हालांकि कंपनी की मौजूदा सेवाएं अभी चलती रहेंगी, लेकिन पैन 2.0 जैसे बड़े प्रोजेक्ट से बाहर होने का दीर्घकालिक प्रभाव कंपनी की ग्रोथ और निवेशकों के विश्वास पर पड़ेगा। आने वाले तिमाहियों में कंपनी को राजस्व विविधीकरण और नई परियोजनाओं की तलाश करनी होगी ताकि यह झटका संतुलित हो सके।
