

मंगलवार का दिन हिन्दू धर्म में विशेष रूप से भगवान हनुमान जी को समर्पित होता है। श्रद्धालु इस दिन उपवास रखते हैं, बजरंगबली के मंदिरों में दर्शन हेतु जाते हैं और “हनुमान चालीसा” का पाठ करते हैं। इस पावन अवसर पर आइए जानते हैं हनुमान जी से जुड़ी एक प्राचीन कथा और एक अद्भुत तथ्य, जो कम ही लोग जानते हैं।
कथा: जब हनुमान जी ने सूर्य को निगल लिया था
बचपन में जब हनुमान जी को भूख लगी, तो उन्होंने आकाश में चमकते हुए सूर्य को एक फल समझकर निगल लिया। इससे तीनों लोकों में अंधकार छा गया और हाहाकार मच गया। इंद्र देवता ने संकट को देखते हुए तुरंत अपना वज्र चलाया जिससे बालक हनुमान बेहोश हो गए। यह देखकर पवन देव क्रोधित हो गए और उन्होंने समस्त वायुप्रवाह को रोक दिया। जब सांस लेने में कठिनाई होने लगी, तो देवताओं ने हनुमान जी से क्षमा मांगी और उन्हें कई वरदान दिए — अमरता, अतुल बल, तेज, विद्या, और न कोई अस्त्र उन्हें क्षति पहुँचा सके। यही कारण है कि हनुमान जी को “अष्टसिद्धि नव निधि के दाता” कहा जाता है और वे अमरत्व को प्राप्त महाशक्तिशाली देवता माने जाते हैं।
हनुमान जी आज भी जीवित हैं!
हिंदू पुराणों के अनुसार, हनुमान जी “चिरंजीवी” हैं — अर्थात् वे अमर हैं और आज भी पृथ्वी पर विद्यमान हैं। मान्यता है कि वे कलयुग में भी धर्म की रक्षा हेतु सक्रिय रहते हैं, और सच्चे मन से पुकारने पर अपने भक्तों की सहायता करते हैं। कुछ मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जी हिमालय की पर्वतमालाओं या किसी दिव्य स्थान पर तपस्यारत हैं, और संकट के समय अपने भक्तों के पास अदृश्य रूप से पहुँचते हैं।
मंगलवारी आस्था का प्रतीक
मंगलवार को हनुमान जी की पूजा करने से भय, रोग, कर्ज और बुरी शक्तियों से मुक्ति मिलती है। कहा जाता है कि जो भक्त इस दिन पूर्ण श्रद्धा और भक्ति से बजरंगबली की आराधना करता है, उसे साहस, बुद्धि और सफलता अवश्य प्राप्त होती है।
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