
वृंदावन: रुक्मिणी विहार स्थित निर्माणाधीन ओमैक्स कोर्टयार्ड मॉल में शुक्रवार सुबह बड़ा हादसा हो गया। चौथी मंजिल पर छत और छज्जे की ढलाई के दौरान अचानक शटरिंग का बड़ा हिस्सा भरभराकर नीचे गिर गया। हादसे में चार मजदूर मलबे की चपेट में आ गए। इनमें से तीन की मौत हो गई, जबकि एक मजदूर गंभीर रूप से घायल है। घायल को उपचार के लिए आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है।
हादसे के बाद निर्माण स्थल पर अफरा-तफरी मच गई। मौके पर मौजूद साथी मजदूरों ने तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू करते हुए मलबे में दबे मजदूरों को बाहर निकाला। हालांकि, मजदूरों का आरोप है कि इतने बड़े निर्माण स्थल पर घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए तत्काल कोई समर्पित वाहन उपलब्ध नहीं था। बाद में कंपनी के एक कर्मचारी की गाड़ी से घायलों को संयुक्त जिला चिकित्सालय पहुंचाया गया।
250 से ज्यादा मजदूर कर रहे थे काम
बताया गया कि निर्माणाधीन परिसर में उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, असम और नेपाल के करीब 250 से अधिक मजदूर काम कर रहे हैं। इनमें से कई मजदूर निर्माण स्थल के आसपास बनाई गई टिन की झोपड़ियों में ही रह रहे हैं।
मजदूरों ने निर्माण स्थल पर पर्याप्त सुरक्षा और आपातकालीन व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि हादसे में चार से अधिक मजदूर घायल होते तो उन्हें अस्पताल पहुंचाने में और बड़ी परेशानी हो सकती थी।
तीन मजदूरों की मौत, एक गंभीर
सीओ सदर वरुण कुमार मिश्रा के अनुसार हादसे में पश्चिम बंगाल के कूचबिहार निवासी रफ्यूल (28), आलम (30) और नेपाल के कैलाली निवासी शिवराम (42) की मौत हुई है। वहीं पश्चिम बंगाल के कूचबिहार निवासी दिलदार (45) गंभीर रूप से घायल हुए हैं। उन्हें आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है।
घटना की सूचना मिलते ही वृंदावन पुलिस, फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस की टीमें मौके पर पहुंचीं। जिलाधिकारी और एसएसपी समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों ने भी घटनास्थल का जायजा लिया।
सीएम योगी ने दिए बेहतर इलाज के निर्देश
हादसे की जानकारी मिलने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घायल मजदूर को बेहतर से बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
परिजनों ने मांगा ₹50 लाख मुआवजा
हादसे में मारे गए शिवराम के परिजनों में घटना के बाद कोहराम मच गया। बताया गया कि शिवराम अपनी पत्नी, बेटी और अन्य परिजनों के साथ वृंदावन में रहकर मजदूरी कर रहा था। उसके साथ काम करने वाले रिश्तेदार अरुण ने बताया कि हादसे से कुछ समय पहले ही वह शौचालय जाने के लिए नीचे आया था, जिसके चलते वह इस हादसे की चपेट में आने से बच गया।
मृतकों के परिजनों ने निर्माण कंपनी पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी और लापरवाही का आरोप लगाते हुए प्रत्येक प्रभावित परिवार के लिए ₹50 लाख मुआवजे की मांग की। परिजनों ने शुरुआत में पोस्टमार्टम कराने से इनकार किया, लेकिन पुलिस के समझाने के बाद वे इसके लिए राजी हो गए।
निर्माण कार्य सहारनपुर की वीकेजी प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड द्वारा कराया जा रहा है। हादसे के बाद कंपनी के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे।
इस घटना ने बड़े निर्माण स्थलों पर शटरिंग की गुणवत्ता, सुरक्षा मानकों, आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था और मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर ऐसे स्थल पर, जहां बड़ी संख्या में दूसरे राज्यों और नेपाल से आए मजदूर काम कर रहे हैं और परिसर के आसपास ही रह रहे हैं, पर्याप्त सुरक्षा एवं आपातकालीन इंतजाम होना बेहद महत्वपूर्ण है।

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