
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने परिवारवाद और पार्टी संगठन में रिश्तेदारों की भूमिका को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि राजनीति में सफलता और समाज के लिए काम करने के लिए नेताओं को निजी एवं पारिवारिक रिश्तों के मोह से ऊपर उठकर पूरी ईमानदारी और निष्ठा से काम करना चाहिए।
मायावती ने कहा कि BSP के संस्थापक मान्यवर कांशीराम ने राजनीति में आने के बाद अपने नजदीकी रिश्तेदारों को राजनीतिक लाभ देने से हमेशा दूरी बनाए रखी। उन्होंने अपने रिश्तेदारों को केवल निःस्वार्थ भाव से पार्टी संगठन में काम करने की अनुमति दी और अपना पूरा जीवन बहुजन समाज के हित के लिए समर्पित किया।
कांशीराम से प्रेरणा लेकर लिया फैसला
मायावती ने कहा कि कांशीराम के इसी विचार और कार्यशैली से प्रेरित होकर उन्होंने भी अपना पूरा जीवन बहुजन समाज के लिए समर्पित करने का फैसला लिया। हालांकि, उन्होंने कहा कि महिला होने के कारण परिस्थितियोंवश उन्हें अपने भाई-बहनों में से किसी न किसी को साथ रखना पड़ा।
उन्होंने बताया कि उनके छोटे भाई आनंद कुमार पिछले कई वर्षों से उनके साथ कार्यरत हैं। मायावती के मुताबिक, आनंद कुमार के विशेष आग्रह पर उनके बड़े बेटे आकाश आनंद को भी राजनीति में आगे बढ़ाया गया था।
आकाश आनंद को लेकर मायावती ने फिर साधा निशाना
मायावती ने कहा कि शादी के बाद आकाश आनंद के रवैये और गतिविधियों के कारण उन्हें कुछ दिन पहले फिर पार्टी से अलग करना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि आकाश आनंद अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के प्रभाव में पूरी तरह फंस चुके हैं।
मायावती ने कहा कि ऐसे में आकाश आनंद को दोबारा पार्टी में शामिल करना पार्टी के हित के साथ बड़ा विश्वासघात होगा और वह ऐसा कोई पार्टी-विरोधी फैसला नहीं कर सकतीं।
आकाश आनंद और उनकी बहन को जिम्मेदारी नहीं देने का फैसला
BSP प्रमुख ने कहा कि पिछले कुछ समय से उनके सामने यह दुविधा थी कि आनंद कुमार के परिवार से किसे पार्टी में आगे किया जाए। सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार करने के बाद उन्होंने फैसला किया है कि परिवार से ऐसे सदस्य को आगे किया जाएगा, जो आकाश आनंद के रास्ते पर न चले।
उन्होंने कहा कि आकाश आनंद की बहन को भी भविष्य में पार्टी की कोई जिम्मेदारी देने से दूर रखा जाएगा। मायावती ने स्पष्ट किया कि इस फैसले में अब कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।
ईशान आनंद को पार्टी में जिम्मेदारी देने की घोषणा
मायावती ने कहा कि आकाश आनंद और उनकी बहन के स्थान पर आनंद कुमार के परिवार से केवल ईशान आनंद को पार्टी में सम्मानजनक जिम्मेदारी देकर आगे बढ़ाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि अभी तक उन्हें ऐसा लगता है कि ईशान आनंद का आकाश आनंद और उनकी बहन की तरह कोई विवाद या ऐसा जुड़ाव नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में क्या होगा, इसके बारे में अभी कुछ निश्चित नहीं कहा जा सकता।
मायावती ने चेतावनी दी कि यदि ईशान आनंद भी कोई गंभीर पार्टी-विरोधी गतिविधि करते हैं तो उन्हें भी पार्टी से बाहर कर दिया जाएगा। ऐसी स्थिति में आनंद कुमार के परिवार के किसी भी अन्य सदस्य को पार्टी में छोटी या बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। इसके बजाय पार्टी में काम कर रहे किसी समर्पित और वफादार दलित कार्यकर्ता को आगे बढ़ाया जाएगा।
23 सितंबर को BSP की अहम बैठक
मायावती ने बताया कि देश और जनहित के महत्वपूर्ण मुद्दों के साथ-साथ इस पूरे विषय पर चर्चा के लिए 23 सितंबर को BSP की ऑल इंडिया बैठक बुलाई गई है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से बैठक के बाद संगठन के कार्यों में पूरी ताकत से जुटने की अपील की।
आंबेडकर के पत्र का भी किया जिक्र
मायावती ने कहा कि परिवार से जुड़े इस फैसले के पीछे उन्हें मान्यवर कांशीराम से प्रेरणा मिली है। साथ ही उन्होंने बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के एक पत्र का भी उल्लेख किया।
उन्होंने बताया कि 23 फरवरी 1956 को 26 अलीपुर रोड, सिविल लाइंस, नई दिल्ली से डॉ. आंबेडकर ने अपने पुत्र यशवंत बी. आंबेडकर को पत्र लिखा था। मायावती के अनुसार, पत्र में डॉ. आंबेडकर ने बौद्ध भूषण प्रिंटिंग प्रेस को सार्वजनिक संपत्ति बताते हुए उसके कामकाज में अनियमितता की अनुमति नहीं देने की बात कही थी और अपने पुत्र के आचरण को उचित नहीं बताया था।
मायावती ने कहा कि इस उदाहरण से स्पष्ट होता है कि सार्वजनिक संस्था और आंदोलन के हित को निजी एवं पारिवारिक रिश्तों से ऊपर रखा जाना चाहिए।
‘समस्त बहुजन समाज ही मेरा असली परिवार’: मायावती
अपने बयान के अंत में मायावती ने कहा कि “समस्त बहुजन समाज ही मेरा असली परिवार है।” उन्होंने कहा कि सत्ता की मास्टर चाबी के माध्यम से बहुजन समाज को ‘शोषित से शासक वर्ग’ बनाना और उनके हित व कल्याण को सुनिश्चित करना उनका मिशन और संकल्प है।
उन्होंने कहा कि बहुजन समाज के हित के लिए वह अपने भाई-बहनों सहित किसी के भी खिलाफ आवश्यक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगी और इसे उन्होंने बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के उदाहरण से प्रेरित अपना संकल्प बताया।

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