
वाराणसी/बुलंदशहर। उत्तर प्रदेश में साइबर अपराध के दो अलग-अलग मामलों ने चिंता बढ़ा दी है। वाराणसी में एक युवक ने आरोप लगाया है कि लोन से जुड़े एक मोबाइल ऐप को डाउनलोड करने के बाद उसे पाकिस्तान के अलग-अलग मोबाइल नंबरों से व्हाट्सऐप कॉल और मैसेज कर पैसे के लिए धमकाया जा रहा है। वहीं बुलंदशहर में पुलिस और साइबर क्राइम टीम ने म्यूल बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके बैंक खातों के जरिए करीब 23 लाख रुपये की साइबर ठगी की पुष्टि हुई है।
युवक को पांच दिन से धमकाने का आरोप
वाराणसी के हुकुलगंज निवासी प्रबल के अनुसार, वह पिछले करीब पांच दिनों से लगातार व्हाट्सऐप कॉल और मैसेज के जरिए परेशान किया जा रहा है। पीड़ित ने मामले की शिकायत साइबर सेल में की, जहां से उसे लालपुर-पांडेयपुर थाने भेजा गया। युवक का आरोप है कि थाने से भी उसे साइबर कैफे जाकर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने की सलाह देकर वापस भेज दिया गया।
पीड़ित के मुताबिक, कुछ दिन पहले उसने गूगल प्ले स्टोर से ‘पैसाकैश पर्सनल क्रेडिट’ नामक एक ऐप डाउनलोड किया था। उसका कहना है कि उसने यह ऐप क्रेडिट स्कोर से जुड़ी जानकारी के लिए डाउनलोड किया था।
प्रबल के अनुसार, ऐप डाउनलोड करने के कुछ ही देर बाद उसके फोन से जुड़े जियो पेमेंट बैंक वॉलेट से अमरदीप कौर नाम के व्यक्ति के खाते में 2700 रुपये भेजे जाने की जानकारी सामने आई।
इसके बाद ऐप में उसके नाम पर 4500 रुपये का लोन शुरू होने की बात दिखाई देने लगी।
पीड़ित का आरोप है कि इसके बाद बुधवार को पाकिस्तान के नंबर से व्हाट्सऐप मैसेज और कॉल आई, जिसमें 4500 रुपये की मांग की गई। उसने कॉल करने वाले व्यक्ति से कहा कि जो 2700 रुपये उसके खाते में आए हैं, वह उन्हें वापस कर देगा।
लिंक भेजकर रुपये वापस कराए, फिर बढ़ी मांग
प्रबल के मुताबिक, इसके बाद उसे एक लिंक भेजा गया, जिसके जरिए उसने रुपये वापस कर दिए। हालांकि, इसके बावजूद मामला खत्म नहीं हुआ।
शुक्रवार को एक बार फिर पाकिस्तान के एक नंबर से व्हाट्सऐप मैसेज और कॉल कर 5040 रुपये की मांग की गई। पीड़ित के अनुसार, उसे कहा गया कि कुछ देर बाद उनका मैनेजर बात करेगा और पैसे नहीं देने पर एफआईआर दर्ज कराने की धमकी दी गई।
तीसरे नंबर से कॉन्टैक्ट लीक करने और फोटो वायरल करने की धमकी
पीड़ित का आरोप है कि कुछ समय बाद तीसरे मोबाइल नंबर से भी व्हाट्सऐप कॉल और मैसेज आने लगे। कॉल करने वालों ने दावा किया कि उन्होंने उसके मोबाइल फोन के सभी कॉन्टैक्ट कॉपी कर लिए हैं।
कथित तौर पर धमकी दी गई कि यदि पैसे नहीं दिए गए तो उसके परिचितों को कॉल और मैसेज किए जाएंगे। इतना ही नहीं, लोन की रकम न चुकाने संबंधी संदेश उसके कॉन्टैक्ट नंबरों पर भेजने और उनसे पैसे मांगने की भी धमकी दी गई।
पीड़ित ने आरोप लगाया कि उसे एडिटेड फोटो उसके परिचितों को भेजने की धमकी भी दी जा रही है। कथित ठगों ने उसके फोन से कॉपी किए गए संपर्कों की सूची भेजकर यह साबित करने की कोशिश की कि उनके पास उसके मोबाइल का डेटा मौजूद है।
मामले में पीड़ित ने कार्रवाई की मांग की है। पुलिस और साइबर एजेंसियों की ओर से शिकायत के तथ्यों की जांच की जानी है।
उधर, बुलंदशहर के ककोड़ थाना क्षेत्र में पुलिस और साइबर क्राइम टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए साइबर ठगों को कथित रूप से म्यूल बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले एक संगठित गिरोह का खुलासा किया है।
पुलिस के अनुसार, इन बैंक खातों के जरिए करीब 23 लाख रुपये की साइबर ठगी की पुष्टि हुई है।
तीन आरोपी गिरफ्तार, दो मोबाइल बरामद
शुक्रवार को पुलिस लाइन में एसपी क्राइम नरेश कुमार ने बताया कि जांच के दौरान सामने आए आरोपियों प्रिंस कुमार, अंकित और प्रदीप, निवासी ग्राम अलौदा जागीर, ककोड़ को पुलिस टीम ने सूचना के आधार पर गिरफ्तार किया।
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों से घटना में इस्तेमाल किए गए दो मोबाइल फोन भी बरामद किए गए हैं।
जांच में सामने आया है कि आरोपी कथित तौर पर अपने और अन्य लोगों के बैंक खातों को साइबर ठगों के लिए उपलब्ध कराकर कमीशन कमाते थे। पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और ठगी की रकम के पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।
साइबर फ्रॉड से बचने के लिए क्या करें?
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी अनजान लोन या क्रेडिट ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसकी विश्वसनीयता की जांच करनी चाहिए। ऐप इंस्टॉल करते समय कॉन्टैक्ट, फोटो, एसएमएस और अन्य संवेदनशील अनुमतियां देने में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
यदि कोई व्यक्ति लोन वसूली के नाम पर धमकी देता है, कॉन्टैक्ट लीक करने या फोटो वायरल करने की बात कहता है, तो घबराकर अतिरिक्त रकम भेजने के बजाय संबंधित सबूत सुरक्षित रखकर तत्काल साइबर अपराध की शिकायत दर्ज करानी चाहिए।

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