
नई दिल्ली: कांग्रेस ने अयोध्या के श्रीराम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर केंद्र सरकार और भाजपा पर तीखा हमला बोला है। राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता और कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में विशेष जांच दल (SIT) से व्यापक और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में प्रमोद तिवारी ने आरोप लगाया कि अयोध्या में भूमि अधिग्रहण से लेकर मंदिर निर्माण और चढ़ावे के प्रबंधन तक कई गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा खरीदे गए सात भूखंड मंदिर परिसर से काफी दूर हैं और उनका मंदिर निर्माण से कोई प्रत्यक्ष संबंध दिखाई नहीं देता। ऐसे में इन जमीनों की खरीद का उद्देश्य स्पष्ट किया जाना चाहिए।
प्रमोद तिवारी ने आरोप लगाया कि भाजपा के लिए भगवान श्रीराम आस्था का नहीं, बल्कि लंबे समय से राजनीतिक और आर्थिक लाभ का विषय रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अयोध्या दौरे की तैयारियों पर करीब 112 करोड़ रुपये खर्च किए गए। उनके अनुसार फूलों की खरीद 5 से 10 गुना अधिक कीमत पर की गई और कुर्सियों के किराये पर भी आवश्यकता से कहीं अधिक धन खर्च किया गया।
कांग्रेस नेता ने कहा कि श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के प्रमुख पदों पर नियुक्तियां भाजपा के प्रभाव में हुईं और मंदिर से जुड़े कई कर्मचारी भाजपा से जुड़े बताए जाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद कुछ पदाधिकारियों के इस्तीफे पूरे प्रकरण की गंभीरता को दर्शाते हैं। ऐसे में मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए सोने और चांदी को पिघलाकर उससे प्राप्त धन को शेयर बाजार में निवेश किया गया। उन्होंने कहा कि इन सभी आरोपों की सच्चाई सामने लाने के लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एसआईटी जांच कराई जानी चाहिए।
प्रमोद तिवारी ने कहा कि वह यह नहीं कहते कि भाजपा के सभी लोग “चंदा चोर” हैं, लेकिन यदि कथित “चढ़ावा चोरी” से जुड़े लोगों की सूची बनाई जाए तो उसमें भाजपा से जुड़े लोगों के नाम सामने आएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा इस पूरे मामले में जवाबदेही से बचने का प्रयास कर रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर का उद्घाटन उस समय किया जब निर्माण कार्य पूरी तरह पूरा नहीं हुआ था। इसे परंपराओं के विपरीत बताते हुए उन्होंने दावा किया कि इसका राजनीतिक असर भी भाजपा पर पड़ा और पार्टी की लोकसभा सीटें 306 से घटकर 240 रह गईं।
हालांकि, कांग्रेस द्वारा लगाए गए ये सभी आरोप राजनीतिक बयान हैं। इन आरोपों पर भाजपा या श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। मामले में किसी भी प्रकार की जिम्मेदारी या दोष का अंतिम निर्धारण जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगा।
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