
लखनऊ। उत्तर प्रदेश को वैश्विक वस्त्रोद्योग केंद्र के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से आयोजित दो दिवसीय ‘यूपी टेक्सटाइल कॉन्क्लेव-2026’ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की टेक्सटाइल इंडस्ट्री की संभावनाओं और सरकार की उपलब्धियों को सामने रखा। मुख्यमंत्री ने कहा कि UP TEX-2026 उत्तर प्रदेश के वस्त्र उद्योग को नई दिशा देने का काम करेगा। उन्होंने कहा कि जब हम यूपी की बात करते हैं तो इसका अर्थ ‘Unlimited Potential’ है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देशभर से आए टेक्सटाइल सेक्टर के उद्यमियों, निवेशकों, निर्यातकों, परंपरागत बुनकरों, हथकरघा संचालकों और इस क्षेत्र में भविष्य तलाश रहे युवाओं का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के पास समृद्ध विरासत, हुनर, विशाल मानव संसाधन, बड़ा बाजार, उद्योग और उद्यमिता के साथ-साथ दुनिया की सबसे युवा कार्यशक्ति में से एक है।
हजारों साल पुरानी है यूपी की टेक्सटाइल पहचान
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की टेक्सटाइल पहचान आज की नहीं, बल्कि हजारों वर्षों की समृद्ध विरासत से जुड़ी है। ‘Uttar Pradesh into a Global Textile Hub’ की थीम पर आयोजित यह कॉन्क्लेव प्रदेश के टेक्सटाइल उद्योग को नई दिशा देने का माध्यम बनेगा।
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश वर्तमान में फैब्रिक मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में देश में तीसरे स्थान पर है। देश के कुल फैब्रिक उत्पादन में प्रदेश की हिस्सेदारी करीब 13 से 14 प्रतिशत है।
योगी ने कहा कि पिछले नौ वर्षों में सरकार ने प्रदेश की समृद्ध परंपरा को आधुनिक तकनीक, निवेश, इनोवेशन और वैश्विक बाजार से जोड़ने का प्रयास किया है। इसके परिणामस्वरूप प्रदेश के वस्त्र, परिधान और हस्तशिल्प निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
छह वर्षों में टेक्सटाइल और हस्तशिल्प निर्यात में 56 फीसदी वृद्धि
मुख्यमंत्री के मुताबिक, पिछले छह वर्षों में उत्तर प्रदेश के वस्त्र, परिधान और हस्तशिल्प निर्यात में करीब 56 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2030 तक देश की टेक्सटाइल एवं अपैरल इकोनॉमी को 350 अरब अमेरिकी डॉलर और टेक्सटाइल एवं अपैरल निर्यात को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इस राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने में उत्तर प्रदेश को अपनी पूरी क्षमता के साथ योगदान देना होगा।
वाराणसी की साड़ी से भदोही के कालीन तक यूपी की पहचान
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों की पारंपरिक कला और शिल्प केवल कारोबार का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान भी हैं। उन्होंने कहा कि वाराणसी की साड़ी, भदोही का कालीन, लखनऊ की चिकनकारी और बरेली की जरी में केवल craftsmanship नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक पूंजी भी छिपी हुई है।
निवेशकों से किए वादों की खुद मॉनिटरिंग करता हूं: योगी
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार निवेशकों से जो वादे और घोषणाएं करती है, उन्हें उत्तर प्रदेश में लागू कराने की जिम्मेदारी भी गंभीरता से निभाई जा रही है। उन्होंने कहा, “हम अपने Investor से जो बातें करते हैं और जितनी घोषणाएं करते हैं, उसको 100 प्रतिशत यूपी के अंदर लागू करवाते हैं। मैं स्वयं उसकी मॉनिटरिंग करता हूं।”
इस दौरान मुख्यमंत्री ने वर्ष 2017 से पहले की कानून-व्यवस्था का जिक्र करते हुए पिछली सरकारों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उस समय ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन माफिया’ यूपी की पहचान बन गया था और हत्या, फिरौती, कब्जा, गुंडा टैक्स व अपहरण जैसी गतिविधियां फल-फूल रही थीं। योगी ने दावा किया कि आज ऐसे सिंडिकेट पूरी तरह समाप्त हो चुके हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी टेक्सटाइल कॉन्क्लेव-2026 के माध्यम से प्रदेश की पारंपरिक कला, आधुनिक तकनीक, निवेश और वैश्विक बाजार को जोड़ते हुए उत्तर प्रदेश को एक मजबूत Global Textile Hub के रूप में विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा।

अनुपम चंद्र ( Anupam Chandra ) एक ग्राउंड रिपोर्टर और कंटेंट लेखक हैं। वे डिजिटल मीडिया की तकनीकी बारीकियों और कंटेंट क्रिएशन के नए तौर-तरीकों की गहरी समझ रखते हैं।



