
एलायंस टुडे ब्यूरो
नई दिल्ली: भारत ने शनिवार को कारगिल विजय दिवस की 26वीं वर्षगांठ पूरे सम्मान और श्रद्धा के साथ मनाई। यह दिन 1999 में पाकिस्तान के खिलाफ कारगिल युद्ध में भारतीय सेना की वीरता और सर्वोच्च बलिदान की याद दिलाता है। कारगिल युद्ध में शहीद हुए लगभग 500 जवानों को श्रद्धांजलि देने के साथ देश ने एक बार फिर अपनी राष्ट्रीय एकता और सैन्य संकल्प का प्रदर्शन किया।
कारगिल युद्ध: संघर्ष और विजय की गाथा
1999 में पाकिस्तान समर्थित घुसपैठियों और सैनिकों ने जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (LoC) के समीप रणनीतिक चोटियों पर गुपचुप तरीके से कब्जा कर लिया था, जिससे भारत की क्षेत्रीय अखंडता को गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया। इसके जवाब में भारत ने ऑपरेशन विजय शुरू किया, जो लगभग तीन महीने चला और 26 जुलाई 1999 को भारत ने सभी कब्जाई गई पहाड़ियों को दुश्मनों से पूरी तरह मुक्त करवा लिया।
शहीदों को श्रद्धांजलि और राष्ट्र का सम्मान
इस मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने शहीदों को श्रद्धांजलि दी। थल सेना प्रमुख ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कारगिल योद्धाओं के अदम्य साहस और बलिदान को नमन किया। साथ ही भारत और नेपाल में शहीदों के परिजनों से सीधा संवाद कर उन्हें सम्मानित किया गया।
कारगिल विजय दिवस के अवसर पर मैं मातृभूमि के लिए प्राण न्योछावर करने वाले वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करती हूं। यह दिवस हमारे जवानों की असाधारण वीरता, साहस एवं दृढ़ संकल्प का प्रतीक है। देश के प्रति उनका समर्पण और सर्वोच्च बलिदान देशवासियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा।
जय…— President of India (@rashtrapatibhvn) July 26, 2025
देशवासियों को कारगिल विजय दिवस की ढेरों शुभकामनाएं। यह अवसर हमें मां भारती के उन वीर सपूतों के अप्रतिम साहस और शौर्य का स्मरण कराता है, जिन्होंने देश के आत्मसम्मान की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। मातृभूमि के लिए मर-मिटने का उनका जज्बा हर पीढ़ी को प्रेरित करता रहेगा। जय…
— Narendra Modi (@narendramodi) July 26, 2025
शौर्य की प्रतीक बन चुकी रणभूमियां
कारगिल युद्ध की लड़ाई अत्यंत कठिन भू-भागों में लड़ी गई, जिनकी ऊँचाई 10,000 फीट से लेकर 17,000 फीट तक थी। इनमें से कुछ प्रमुख रणक्षेत्र थे:
टोलोलिंग पीक (15,000 फीट):
श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-1) पर नजर रखने वाला यह क्षेत्र अत्यंत रणनीतिक था। यहां भारतीय जवानों ने भारी नुकसान झेलते हुए दुश्मनों को पीछे धकेला।
टाइगर हिल (16,700 फीट):
यह युद्ध का सबसे प्रतिष्ठित मोर्चा था। भारतीय जवानों ने रात के अंधेरे में खड़ी चट्टानों पर चढ़ाई कर यह चोटी फिर से हासिल की, जो असाधारण साहस का प्रतीक बना।
पॉइंट 5140 और पॉइंट 4875 (बत्रा टॉप):
कैप्टन विक्रम बत्रा जैसे वीर जवानों के नेतृत्व में इन ऊँचाइयों पर भीषण युद्ध हुआ। इनकी जीत ने भारत को रणनीतिक बढ़त दिलाई।
बाटालिक और मुश्कोह सेक्टर:
ये क्षेत्र लगातार संघर्ष के केंद्र में रहे, और भारत ने इन इलाकों में भी शत्रुओं को बाहर निकाल कर नियंत्रण स्थापित किया।
