
नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने माल ढुलाई क्षमता बढ़ाने और रेल परिचालन में भीड़भाड़ कम करने के लिए दक्षिण पूर्व रेलवे के आद्रा और जॉयचंडीपहाड़ के बीच 11 किलोमीटर लंबी बाईपास लाइन के निर्माण को मंजूरी दे दी है। इस महत्वपूर्ण परियोजना पर ₹272 करोड़ की लागत आएगी।
रेलवे के अनुसार, आद्रा-जॉयचंडीपहाड़-सांका बाईपास परियोजना से मालगाड़ियों की आवाजाही को अधिक सुगम बनाने के साथ ही मौजूदा रेल नेटवर्क पर दबाव कम करने में मदद मिलेगी।
मालगाड़ियों के लिए बनेगा अलग और सुगम मार्ग
इस परियोजना के तहत आगामी तीसरी रेल लाइन से द्वि-दिशीय कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई जाएगी। इससे रेल मार्गों का बेहतर विभाजन होगा और मालगाड़ियों के परिचालन को गति मिलेगी।
रेलवे के अनुमान के मुताबिक, इस परियोजना से प्रतिदिन करीब 6.065 मालगाड़ी रेक की अनुमानित आवाजाही को समर्थन मिलेगा। यह बाईपास बढ़ते औद्योगिक यातायात के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होगी।
परियोजना विशेष रूप से SAIL की 23.40 एमटीपीए (मिलियन टन प्रति वर्ष) लौह अयस्क आवश्यकता और BCCL द्वारा प्रतिदिन 45 रेक की अनुमानित जरूरत से जुड़े माल परिवहन को सहयोग देगी।
भीड़भाड़ और परिचालन बाधाएं होंगी कम
आद्रा-जॉयचंडीपहाड़ खंड पर मौजूदा समय में सतह क्रॉसिंग और अन्य परिचालन बाधाओं के कारण मालगाड़ियों की गति प्रभावित होती है। रेलवे नेटवर्क की क्षमता का करीब 71 प्रतिशत उपयोग होने के कारण भविष्य में यातायात बढ़ने पर दबाव और बढ़ने की संभावना है।
नई बाईपास लाइन बनने के बाद इन परिचालन बाधाओं को कम करने और रेल यातायात को अधिक सुचारु बनाने में मदद मिलेगी। परियोजना पूरी होने के बाद करीब 8.88 एमटीपीए अतिरिक्त यातायात को संभालने की क्षमता विकसित होने की उम्मीद है।
ऊर्जा, खनिज और सीमेंट कॉरिडोर को मिलेगा बल
यह परियोजना भारतीय रेलवे द्वारा चिन्हित एनर्जी, मिनरल एंड सीमेंट कॉरिडोर का हिस्सा है। इसके माध्यम से कोयला, लौह अयस्क, सीमेंट और अन्य औद्योगिक वस्तुओं की ढुलाई को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
रेलवे के अनुसार, जॉयचंडीपहाड़-आद्रा खंड की वर्तमान लाइन क्षमता 47.50 प्रतिशत है, जिसके 2028-29 तक बढ़कर 56.45 प्रतिशत होने का अनुमान है।
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औद्योगिक माल ढुलाई को मिलेगी नई रफ्तार
रेलवे का मानना है कि आद्रा-जॉयचंडीपहाड़ कॉरिडोर में अतिरिक्त क्षमता विकसित होने से मालगाड़ियों की आवाजाही अधिक विश्वसनीय और निर्बाध होगी। इससे औद्योगिक क्षेत्रों की बढ़ती परिवहन जरूरतों को पूरा करने के साथ ही भविष्य में माल ढुलाई बढ़ाने का रास्ता भी मजबूत होगा।
₹272 करोड़ की यह परियोजना रेल नेटवर्क के आधुनिकीकरण और देश में तेज, सुरक्षित व कुशल माल परिवहन व्यवस्था विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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