Published by: Digital Desk | Edited by: GULZAAR VERMA
-बसपा और कांग्रेस प्रत्याशी नदारद
उरई (जालौन) विधान परिषद के इलाहाबाद-झांसी खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में 2026 का द्विवार्षिक चुनाव सपा और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला बनता जा रहा है। नामांकन प्रक्रिया 29 सितंबर को शुरू होने के«’© बाद भी बसपा ने अब तक अपना प्रत्याशी नहीं उतारा है। जबकि कांग्रेस के सपा को समर्थन देने की संभावनाएं चुनावी समीकरणों में अहम भूमिका निभा सकती हैं। चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार 29 सितंबर 2026 को अधिसूचना जारी होने के साथ नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी। नामांकन की अंतिम तिथि 6 अक्टूबर, नामांकन पत्रों की जांच 7 अक्टूबर और नाम वापसी की अंतिम तिथि 9 अक्टूबर निर्धारित है। मतदान 23 अक्टूबर को सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक होगा, जबकि मतगणना 27 अक्टूबर को कराई जाएगी। इस निर्वाचन क्षेत्र में कुल 10 जिले शामिल हैं-प्रयागराज, कौशाम्बी, फतेहपुर, चित्रकूट, बांदा, हमीरपुर, महोबा, जालौन, झांसी और ललितपुर। जालौन भी इस विधान परिषद निर्वाचन क्षेत्र का अभिन्न हिस्सा है, जिससे बुंदेलखंड के मतदाताओं की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। मतदाताओं की संख्या के लिहाज से प्रयागराज में सर्वाधिक मतदाता हैं, इसके बाद झांसी और फतेहपुर का स्थान आता है। भाजपा ने इलाहाबाद-झांसी स्नातक सीट से अशोक कुमार राठौर को प्रत्याशी बनाया है। मूल रूप से जालौन के उरई निवासी राठौर को यह टिकट उनकी पार्टी के प्रति वफादारी और संगठन में निभाई गई जिम्मेदारियों का इनाम माना जा रहा है। वह लंबे समय से शिक्षक संगठनों से जुड़े रहे हैं और माध्यमिक वित्तविहीन शिक्षक महासभा के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं।राठौर पहले इलाहाबाद-झांसी खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से भी चुनाव लड़ चुके हैं। 2023 के शिक्षक एमएलसी चुनाव में उन्होंने नामांकन किया था और बाद में भाजपा प्रत्याशी डॉ. बाबूलाल तिवारी के समर्थन में चुनाव से हटने की घोषणा की थी। मार्च 2026 में उन्हें भाजपा का जिला उपाध्यक्ष बनाया गया था, जबकि 2025 में उन्हें भाजपा के शिक्षक प्रकोष्ठ के कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र में सह संयोजक की जिम्मेदारी दी गई थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बुंदेलखंड में भाजपा प्रत्याशी अशोक राठौर को अधिक मतदाताओं का समर्थन मिलने की संभावना है। उनकी पकड़ इलाहाबाद से लेकर फतेहपुर, बांदा तक अच्छी मानी जाती है, खासकर शिक्षक और स्नातक मतदाताओं के बीच। सपा का पुराना चेहरा डॉ. मानसिंह वर्मा सपा ने मौजूदा एमएलसी डॉ. मानसिंह वर्मा को फिर से मैदान में उतारा है। इलाहाबाद के निवासी होने का उन्हें स्थानीय स्तर पर लाभ मिल सकता है। उनका पिछला कार्यकाल ठीक-ठाक रहा है और वे स्वभाव से विनम्र माने जाते हैं। डॉ. वर्मा की पहुंच सीधे मतदाताओं तक है और वे पिछला चुनाव जीतकर मतदाताओं के बीच जा चुके हैं। वर्तमान में वे इलाहाबाद के आसपास मतदाताओं को रिझाने में लगे हुए हैं। उनकी स्थानीय पहचान और कार्यकाल के अनुभव का फायदा सपा को मिलने की उम्मीद है। इस सीट पर मौजूदा सदस्य डॉ. मान सिंह यादव का कार्यकाल 6 दिसंबर 2026 को खत्म हो रहा है, जिसके कारण यह चुनाव हो रहा है। इन 10 जिलों में कुल मिलाकर लाखों स्नातक मतदाता हैं, जो इस चुनाव को प्रतिष्ठित बनाते हैं।बसपा के अभी तक प्रत्याशी न उतारने से सपा-भाजपा के बीच सीधा मुकाबला तय माना जा रहा है। कांग्रेस के सपा को समर्थन देने की संभावना सपा के पलड़े को भारी कर सकती है, लेकिन आधिकारिक घोषणा का इंतजार बाकी है।
नामांकन की अंतिम तिथि 6 अक्टूबर तक और भी कई राजनीतिक गठजोड़ सामने आ सकते हैं। चुनाव परिणाम 27 अक्टूबर को सामने आएंगे, जो उत्तर प्रदेश की राजनीति में सपा और भाजपा के बीच चल रहे संघर्ष का एक अहम संकेत देंगे।
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