

एलायंस टुडे ब्यूरो
लखनऊ: समाजवादी पार्टी (सपा) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच ‘डीएनए’ को लेकर छिड़ा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक पर निशाना साधते हुए कहा कि वे स्वयं को भगवान श्रीकृष्ण का वंशज मानते हैं और उनके डीएनए पर टिप्पणी करना न केवल व्यक्तिगत अपमान है, बल्कि धार्मिक भावनाओं को भी आहत करता है।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक लंबी पोस्ट साझा की, जिसमें उन्होंने लिखा कि ब्रजेश पाठक की टिप्पणी से आहत पार्टी कार्यकर्ताओं को उन्होंने समझाया है और आश्वासन लिया है कि वे संयम बरतेंगे। साथ ही उन्होंने ब्रजेश पाठक से भी अपेक्षा जताई कि वे अपने बयानों में मर्यादा का पालन करें, क्योंकि उनका पद एक गरिमा की मांग करता है।
उन्होंने आगे लिखा कि एक स्वास्थ्य मंत्री होने के नाते पाठक को यह समझना चाहिए कि किसी के डीएनए पर टिप्पणी करना उस व्यक्ति के मूलवंश और सांस्कृतिक विरासत पर सवाल उठाने जैसा है। अखिलेश ने स्पष्ट किया कि वे यदुवंशी हैं, जिनका संबंध भगवान श्रीकृष्ण से है, और इस प्रकार उनकी धार्मिक भावनाएं भी इस टिप्पणी से आहत हुई हैं।
अखिलेश ने यह भी कहा कि वे मानते हैं कि ब्रजेश पाठक के व्यक्तित्व में ऐसा दुर्भावनापूर्ण विचार नहीं है, लेकिन आम जनता इसे गलत समझ सकती है। उन्होंने आग्रह किया कि राजनीति करते हुए नैतिकता और धर्म की संवेदनशीलता का ध्यान रखा जाना चाहिए।
वहीं, ब्रजेश पाठक ने पलटवार करते हुए सपा मीडिया सेल पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सपा के नेता जिस भाषा का प्रयोग कर रहे हैं, उससे नहीं लगता कि यह पार्टी अब राममनोहर लोहिया और जनेश्वर मिश्र की विचारधारा पर चल रही है। उन्होंने तंज करते हुए कहा कि सपा नेताओं को लोहिया और जेपी की शिक्षा दी जानी चाहिए ताकि उनके आचरण और भाषा में समाजवाद की झलक दिखे।
पाठक ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए प्रभु ईसा मसीह के अंदाज़ में कहा—”हे लोहिया, हे जनेश्वर जी, इन नादानों को क्षमा करें। इन्हें न समाजवाद का ज्ञान है, न ही सभ्य संवाद का तरीका।” उन्होंने सपा पर अश्लीलता और अराजकता फैलाने का आरोप लगाया और कहा कि जब विपक्ष में ये लोग ऐसे हैं, तो सत्ता में क्या किया होगा, इसका सहज अनुमान लगाया जा सकता है।
उन्होंने सपा नेताओं को शिशुपाल बताते हुए कहा कि जैसे भगवान श्रीकृष्ण ने शिशुपाल का वध उसकी 101वीं गलती पर किया था, वैसे ही यूपी की जनता पिछले दस वर्षों से इनका ‘उपचार’ करती आ रही है।
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी इस विवाद पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ‘परिवारवादी समाजवाद’ अब ‘लठैतवाद’ में तब्दील हो चुका है और भविष्य में जनता इन्हें अपने वोटों से पूरी तरह साफ कर देगी।
यह विवाद आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की सियासत में और गर्मी ला सकता है, क्योंकि दोनों पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं हैं और हर शब्द अब चुनावी हथियार बनता जा रहा है।
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