
एलायंस टुडे ब्यूरो
लखनऊ। ‘अभियन्ता दिवस’ पर बिजली अभियन्ताओं ने ‘भारत रत्न’ सर एम विश्वेश्वरैया को याद किया। साथ ही, बिजली व्यवस्था में लगातार हुए सुधार को देखते हुए पूर्वांचल व दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का प्रस्ताव निरस्त करने की मांग की। अभियन्ताओं ने यह मांग सोमवार को ‘भारत रत्न’ सर एम विश्वेश्वरैया के 164वें जन्म दिवस पर उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद अभियन्ता संघ के तत्वावधान में हाईडिल फील्ड हॉस्टल में आयोजित परिचर्चा कार्यक्रम में की गई।
बिजली अभियंताओं ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि प्रदेश में बिजली व्यवस्था में लगातार हो रहे सुधार को देखते हुए पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम व दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय तत्काल निरस्त किया जाना चाहिए। विकसित भारत के संकल्प को सफल बनाने के लिए ऊर्जा निगमों में चेयरमैन व प्रबंध निदेशकों के पदों पर विशेषज्ञ अभियन्ताओं की ही तैनाती की जाय। इससे प्रदेश की जनता को निर्बाध सस्ती बिजली मिल सकेगी व ऊर्जा निगमों के बढ़ते घाटे पर अंकुश लग सकेगा।
सर एम विश्वेश्वरैया व अन्य महान अभियन्ताओं के सराहनीय कार्यों पर प्रकाश डालते हुए अभियन्ता संघ के महासचिव जितेन्द्र सिंह गुर्जर ने कहा कि देश में सबसे पहले 400 केवी पारेषण लाइन व उपकेन्द्र की परिकल्पना, निर्माण व संचालन का कार्य, 100 मेगावाट व 200 मेगावाट की तापीय इकाईयाँ डिजाइन करने व सफलतापूर्वक संचालित करने वाला अग्रणी उप्र बिजली बोर्ड ही है। बीते जून माह में 31,486 मेगावाट से अधिक बिजली का सफलतापूर्वक पारेषण व वितरण किया गया है जो अब तक का एक रिकॉर्ड है। हाल ही में पारेषण निगम को राष्ट्र स्तर पर स्टेट ट्रांसमिशन कम्पनी ऑफ द इयर का अवॉर्ड भी मिला है जो कि बिजली व्यवस्था में हुए गुणात्मक सुधार का उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्रदेश में बिजली के 9 निगम हैं। इन सभी निगमों के अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक आईएएस हैं। कई विकसित देशों में तकनीकी विभागों का नेतृत्व उन्हीं तकनीकी विशेषज्ञों को दिया जाता है जिन्होंने उस क्षेत्र में कार्य किया हो। देश की नवरत्न व महानवरत्न कंपनियों की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कामयाब प्रतिद्वंदिता का सबसे बड़ा राज यही है कि इन सब में प्रबंध के शीर्ष पद पर विशेषज्ञ हैं। इससे नीति बनाने और उसके क्रियान्वयन में संतुलन रहता है। इसीलिए ऊर्जा निगमों व अभियन्ताओं की दिशा व दशा सुधारने के लिए प्रदेश सरकार प्रदेश हित में ऊर्जा निगमों में चेयरमैन व प्रबंध निदेशकों के पदों पर विशेषज्ञ अभियन्ताओं की तैनाती किये जाने के सम्बन्ध मेंं कदम उठाये।
संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि बिजली कर्मियों का मुख्य उद्देश्य हर घर हर गांव तक सस्ती बिजली पहुंचाना है। बिजली कर्मी सीमित संसाधनों के बावजूद उत्तर प्रदेश के 3 करोड़ 63 लाख उपभोक्ताओं तक निर्बाध बिजली आपूर्ति का कार्य कर रहे हैं। बीते 8 वर्षों में एटीएण्डसी हानियां 42 प्रतिशत से घटकर 15 प्रतिशत पर आ गयी हैं जो राष्ट्रीय मापदण्ड है। एटी एण्ड सी हानियों में चालू वित्तीय वर्ष में और कमी आने की सम्भावना है। सार्वजनिक क्षेत्र में उप्र में बिजली व्यवस्था में लगातार सुधार हो रहा है। तब पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम व दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय तत्काल निरस्त किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि निजीकरण के पीछे मुख्य कारण घाटा बताया जा रहा है जो पूरी तरह गलत है और पॉवर कारपोरेशन झूठे आकड़ों के आधार पर घाटा बता रहा है। इसके अतिरिक्त किसानों, बुनकरों आदि को मिलने वाली सब्सिडी और सरकारी विभागों के राजस्व बकाये को भी पॉवर कारपोरेशन घाटे में जोड़कर दिखा रहा है।
विकसित भारत के लिए सार्वजनिक क्षेत्र में पॉवर सेक्टर बनाये रखना जरूरी है। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि प्रदेश की जनता को सस्ती बिजली उपलब्ध कराने के संकल्प को पूरा करने के लिए अनपरा व ओबरा में प्रस्तावित 800-800 मेगावाट की परियोजना को प्रदेश के ही उत्कृष्ट अभियन्ताओं के जरिए उप्र राज्य विद्युत उत्पादन निगम के पूर्ण स्वामित्व में स्थापित की जाय। पारेषण में टैरिफ बेस्ड कंपीटीटिव बिडिंग (टीबीसीबी) को बंद कर नई बनने वाली पारेषण की सभी परियोजनाओं, सब स्टेशन और लाईनों को यूपी ट्रांसकों को देने की भी मांग की गई। कार्यक्रम में उपस्थित अभियन्ताओं नें एम विश्वेश्वरैया के चित्र पर माल्यार्पण व पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित की।
यह एलायंस टुडे का आधिकारिक न्यूज़ रूम (Digital Desk) है, जहां गुलजार वर्मा ( Gulzaar Verma ) जैसे पत्रकारों की एक अनुभवी टीम काम करती है जोकि ग्राउंड रिपोर्टिंग और विश्वसनीय स्रोतों से मिली सूचनाओं को जिम्मेदारी के साथ प्रोसेस करके जनहित की खबरें पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करती है.



