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एलायंस टुडे ब्यूरो
आज बुधवार 20 मई को वरदा चतुर्थी का पावन पर्व मनाया जा रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा करने से भक्तों को विशेष फल प्राप्त होता है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। इसलिए इस दिन पूजा सही तरीके से करना बेहद शुभ माना जाता है।
पूजा विधि
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। घर के मंदिर की सफाई करके लकड़ी की चौकी पर लाल या हरा कपड़ा बिछाएं और उस पर गणेश जी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। साथ में मंगल कलश रखें। इसके बाद गणपति जी को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और चीनी) से स्नान कराकर स्वच्छ जल से अभिषेक करें। भगवान को वस्त्र, जनेऊ, चंदन, धूप-दीप और फूल अर्पित करें। पूजा में दूर्वा अवश्य चढ़ाएं और मोदक या गुड़ का भोग लगाएं। गणेश मंत्रों का जप करें, आरती करें और अंत में प्रसाद सभी में बांट दें।
शुभ मुहूर्त और सावधानी
मान्यता है कि चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन करने से मिथ्या कलंक लग सकता है, इसलिए इस दिन चंद्रमा देखने से बचना चाहिए।
चतुर्थी मध्याह्न मुहूर्त सुबह 10:56 बजे से 11:06 बजे तक रहेगा।
19 मई को वर्जित चंद्र दर्शन का समय दोपहर 2:18 बजे से रात 10:13 बजे तक रहा।
20 मई को वर्जित चंद्र दर्शन का समय सुबह 8:43 बजे से 11:08 बजे तक है।
गणेश जी की आरती
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा, माता पार्वती और पिता महादेव के पुत्र गणेश जी विघ्नों को दूर करने वाले और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करने वाले माने जाते हैं। उनकी आरती में उनके एकदंत स्वरूप, मूषक वाहन, भक्तों पर कृपा और सुख-समृद्धि देने वाले स्वरूप का गुणगान किया जाता है। श्रद्धा और भक्ति के साथ आरती करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
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