
एलायंस टुडे ब्यूरो
लखनऊ: ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म के विरोध में बुधवार (20 मई 2026) को देशभर में केमिस्टों की हड़ताल का असर देखने को मिला। राजधानी लखनऊ समेत प्रदेश के कई प्रमुख शहरों में मेडिकल स्टोर बंद रहे, जिससे लोगों को दवाएं लेने में परेशानी का सामना करना पड़ा। अमीनाबाद, चारबाग और चौक जैसे बड़े दवा बाजारों में सुबह से ही दुकानें बंद नजर आईं। दवा व्यापारियों का कहना है कि ऑनलाइन दवा बेचने वाले प्लेटफॉर्म बिना पर्याप्त जांच और फार्मासिस्ट की निगरानी के दवाएं बेच रहे हैं, जो मरीजों की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है।
ई-फार्मेसी के खिलाफ देशव्यापी हड़ताल
ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) ने ऑनलाइन दवा बिक्री और भारी डिस्काउंटिंग के विरोध में 24 घंटे की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया। संगठन का दावा है कि इस बंद में देशभर के करीब 12.5 लाख केमिस्ट शामिल हुए।
लखनऊ में केमिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन और अन्य संगठनों के बैनर तले व्यापारियों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान व्यापारियों ने हाथों में पम्पलेट लेकर विरोध जताया।
मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा मामला
एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ कारोबार की प्रतिस्पर्धा नहीं बल्कि मरीजों की सुरक्षा का मुद्दा है। उनका आरोप है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर फर्जी प्रिस्क्रिप्शन के जरिए दवाएं बेची जा रही हैं, जिससे गलत इलाज और साइड इफेक्ट का खतरा बढ़ सकता है।
प्रतिबंधित दवाओं की आसान उपलब्धता पर चिंता
दवा व्यापारियों ने चिंता जताई कि ऑनलाइन माध्यम से स्लीपिंग पिल्स, दर्द निवारक और अन्य नियंत्रित दवाएं युवाओं तक आसानी से पहुंच रही हैं। इससे दवाओं के गलत इस्तेमाल और नशे की समस्या बढ़ने की आशंका जताई गई है।
भारी छूट और गुणवत्ता पर सवाल
व्यापारियों का कहना है कि ई-फार्मेसी कंपनियां भारी छूट देकर दवाएं बेच रही हैं, जो तय नियमों और मार्जिन के खिलाफ है। इससे नकली दवाओं और सप्लाई चेन में गड़बड़ी की संभावना भी बढ़ सकती है।
इमरजेंसी सेवाएं रहीं जारी
हड़ताल के बावजूद संगठनों ने दावा किया कि इमरजेंसी और जीवनरक्षक दवाओं की उपलब्धता बनाए रखने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है, ताकि गंभीर मरीजों को परेशानी न हो।
ये दुकानें रहीं खुली
देशव्यापी बंद के बीच अस्पतालों के मेडिकल स्टोर, बड़ी फार्मेसी चेन, जन औषधि केंद्र और अमृत फार्मेसी जैसी सेवाएं खुली रहीं। कुछ राज्यों की रिटेल फार्मेसी एसोसिएशनों ने बंद में शामिल नहीं होने का फैसला भी किया।
सरकार से प्रमुख मांगें
केमिस्ट संगठनों ने सरकार से मांग की है कि ऑनलाइन दवा बिक्री पर सख्त नियम लागू किए जाएं, फर्जी प्रिस्क्रिप्शन पर रोक लगे फार्मासिस्ट की अनिवार्य निगरानी सुनिश्चित की जाए
संगठनों ने चेतावनी दी है कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
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