
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के पशुपालन विभाग में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। पशु चिकित्सा संघ के अध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार ने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ. राजेंद्र प्रसाद और उत्तर प्रदेश लाइवस्टॉक डेवलपमेंट बोर्ड (UPLDB) के सीईओ डॉ. पीके सिंह की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।
डॉ. मनोज कुमार का आरोप है कि पशुओं के इलाज और संरक्षण के लिए जारी सरकारी धन के इस्तेमाल में बड़े स्तर पर अनियमितताएं की गई हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है।
करोड़ों रुपये की घटिया दवाओं की खरीद का आरोप
पशु चिकित्सा संघ अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि पशुओं के उपचार के लिए करोड़ों रुपये की दवाओं की खरीद की गई, लेकिन इनमें कई दवाएं कथित तौर पर घटिया या मानक के अनुरूप नहीं थीं। उनका कहना है कि सरकारी धन खर्च होने के बावजूद पशुओं को अपेक्षित उपचार सुविधा नहीं मिल सकी।
75 जिलों के बजट को लेकर भी सवाल
डॉ. मनोज कुमार ने आरोप लगाया कि प्रदेश के सभी 75 जिलों के लिए निर्धारित बजट का इस्तेमाल व्यापक स्तर पर करने के बजाय कथित साठगांठ के जरिए इसे केवल 15 जिलों तक सीमित कर दिया गया। उन्होंने इन जिलों में बजट के दुरुपयोग और कथित गबन की जांच की मांग की है।
स्लॉटर हाउस शुल्क में ₹600 करोड़ की कथित हेराफेरी का आरोप
संघ अध्यक्ष ने स्लॉटर हाउस से संबंधित सरकारी शुल्क की वसूली में भी गंभीर अनियमितता का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि करीब ₹600 करोड़ के शुल्क/राजस्व की कथित तौर पर चोरी या हेराफेरी हुई है। उन्होंने इस पूरे मामले की वित्तीय जांच कराने की मांग की है।
घटिया सीमेंट खरीदने का भी आरोप
उन्होंने गौवंश संरक्षण केंद्रों और गौशालाओं के निर्माण में कथित तौर पर घटिया गुणवत्ता के सीमेंट के इस्तेमाल का आरोप लगाया। उनका कहना है कि निर्माण की गुणवत्ता प्रभावित होने से गौवंश की सुरक्षा पर भी प्रतिकूल असर पड़ा।
गौवंश की संख्या में 37% कमी का दावा
डॉ. मनोज कुमार ने दावा किया कि विभाग में कथित भ्रष्टाचार, अव्यवस्था और पशुओं के लिए उपलब्ध संसाधनों के उचित इस्तेमाल न होने के कारण प्रदेश में गौवंश की संख्या में 37 प्रतिशत की कमी आई है। हालांकि, इस आंकड़े और इसके कारणों की आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
पशु चिकित्सा संघ अध्यक्ष ने इन सभी आरोपों की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। मामले में लगाए गए आरोपों की वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

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