

एलायंस टुडे ब्यूरो
लखनऊ। आगरा की बिजली व्यवस्था टोरेंट पावर को देने की बिडिंग को सीएजी द्वारा निरस्त करने की अनुशंसा दबा दी गई थी। गलत बिडिंग से पॉवर कारपोरेशन को प्रति वर्ष अरबों रुपए का नुकसान हो रहा है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश ने यह आरोप लगाया। संघर्ष समिति ने कहा कि सीएजी ने आगरा की बिजली व्यवस्था टोरेंट पावर को देने की बिडिंग की संपूर्ण प्रक्रिया को ही दस साल पहले गलत करार देते हुए इसे निरस्त किए जाने की अनुशंसा की थी। पर कैग की रिपोर्ट को दबा दिया गया जिसका दुष्परिणाम यह है कि गलत करार से पावर कारपोरेशन को प्रतिवर्ष अरबों रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है। संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि आगरा फ्रेंचाइजी की बिडिंग में किए गए घोटाले और कैग की अनुशंसा दबा देने के मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और घोटाला करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाय। संघर्ष समिति ने यह भी कहा है कि उत्तर प्रदेश में पूर्व में हुए आगरा और ग्रेटर नोएडा के निजीकरण में घोटाले को देखते हुए पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया तत्काल निरस्त की जानी चाहिए।
संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कॉरपोरेशन कथित घाटे का हवाला देते हुए पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की कार्यवाही कर रहा है। संघर्ष से समिति ने कहा कि पावर कारपोरेशन का प्रबंध घाटे को लेकर इतना संवेदनशील है तो उसे सबसे पहले आगरा का फ्रेंचाइजी करार तत्काल रद्द कर देना चाहिए जिसके चलते पावर कारपोरेशन को प्रति वर्ष 1000 करोड रुपए का नुकसान हो रहा है। संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां कहा कि दस वर्ष पूर्व 2015 में सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि “आगरा फ्रेंचाइजी की बिडिंग हेतु बनाए गए आर एफ पी में दर्शाए गए आंकड़े और परामर्शदाता द्वारा आंकलित आरक्षित दरें भ्रामक थी और गलत अवधारणाओं पर आधारित थी तो बिडिंग की संपूर्ण प्रक्रिया को ही निरस्त किया जाना चाहिए था और सही किए गए आंकड़ों के आधार पर एक नई निविदा को आमंत्रित करने की शुरुआत करनी चाहिए थी”।
संघर्ष समिति ने बताया कि कैग की रिपोर्ट में घोटाले के कई बिंदु उजागर किए गए हैं जिन्हें दबा दिया गया है। सीएजी द्वारा उठाया गया एक और सबसे प्रमुख बिंदु यह है कि दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम ने टी एंड डी हानियां 28.22% और संग्रहण क्षमता 82.34 प्रतिशत के आर एफ पी में दिए गए मूल आंकड़ों के स्थान पर टी एंड डी हानियां 44.85% और संग्रहण क्षमता 74.77% को अभिसूचित किया जिसका न तो कोई आधार था न कोई तर्कसंगतता। संघर्ष समिति ने कहा कि टी एंड डी हानियां 28.2% के स्थान पर 44.85% बता देने से टोरेंट पावर को बहुत सस्ती दरों पर पॉवर कॉरपोरेशन बिजली दे रहा है और आज तक अरबों रुपए प्रतिवर्ष का घाटा हो रहा है।
सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि बीड मूल्यांकन प्रक्रिया में भारी अनियमितता होने के कारण अनुबंध के 18 वर्षों में पावर कारपोरेशन को 4601 करोड़ रुपए की हानि होगी। संघर्ष समिति ने कहा कि टोरेंट पावर कंपनी को लागत से कम मूल्य पर बिजली देने में पावर कारपोरेशन को 14 वर्षों में 3432 करोड रुपए की हानि हो चुकी है। इससे स्पष्ट होता है कि कैग ने अपनी रिपोर्ट में गलत अनुबंध के करण घाटे का सही मूल्यांकन किया था। संघर्ष समिति ने कहा कि इस कारण और घाटा न हो इसलिए जरूरी है घोटाले के आधार पर निर्धारित आगरा फ्रेंचाइजी करार तुरंत रद्द किया जाए। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि आगरा फ्रेंचाइजी अवार्ड करने में हुए घोटाले और नोएडा पावर कंपनी के घोटाले के बारे में संघर्ष समिति आने वाले दिनों में और खुलासा करेगी। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में लगातार 285 दिन से चल रहे आंदोलन के क्रम में आज सभी जिलों पर बिजली कर्मचारियों ने निजीकरण के विरोध में प्रदर्शन किया।
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