
Ganesh Chaturthi 2025 (images by Googlle Ai Studio)

धीरेन्द्र वर्मा
Ganesh Chaturthi 2025 का पर्व इस वर्ष विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह बुधवार के दिन पड़ रहा है, जो स्वयं भगवान गणेश को समर्पित दिन माना जाता है। मान्यता है कि बुधवार को गणपति की आराधना करने से धन, बुद्धि और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। ऐसे में अगर आप इस साल अपने घर या कार्यस्थल पर बप्पा को विराजमान करने की योजना बना रहे हैं, तो कुछ खास बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं Ganesh Chaturthi 2025 की शुभ तिथि, पूजा विधि, मूर्ति चयन और जरूरी नियम।
Ganesh Chaturthi 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त
गणेश चतुर्थी 2025 इस वर्ष बुधवार, 27 अगस्त 2025 को मनाई जाएगी
चतुर्थी तिथि की सीमा:
प्रारंभ: 26 अगस्त 2025, दोपहर 1:54 बजे से
समाप्ति: 27 अगस्त 2025, शाम 3:44 बजे
पूजा का शुभ मुहूर्त
11:05 AM से 1:40 PM, लगभग 2 घंटे 35 मिनट का समय सबसे शुभ माना गया है।
यह समय विभिन्न शहरों में थोड़ा भिन्न हो सकता है — उदाहरण के लिए, पुणे में 11:21 AM से 1:51 PM तक, दिल्ली में 11:05 AM से 1:40 PM, बैंगलोर में 11:07 AM से 1:36 PM इत्यादि।
चन्द्र दर्शन से बचने की अवधि (Moon Sighting Avoidance)
26 अगस्त 2025: 1:54 PM से 8:29 PM तक चन्द्र दर्शन नहीं करना चाहिए
27 अगस्त 2025: 9:28 AM से 8:57 PM तक सावधानीपूर्वक चन्द्र दर्शन से बचें ।
यह परंपरा पौराणिक कथा पर आधारित है, जिसमें गणेश जी ने चंद्र को श्राप दिया था, इस दिन चंद्र दर्शन को अशुभ माना जाता है।
Ganesh Visarjan की तिथि
गणेश चतुर्थी का 10-दिनीय उत्सव Saturday, 6 September 2025 को विसर्जन (Visarjan) के साथ समाप्त होगा

कैसी होनी चाहिए गणेश जी की मूर्ति?
गणेश चतुर्थी पर मूर्ति का चयन बहुत महत्वपूर्ण माना गया है।
मिट्टी की मूर्ति चुनें: पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से हमेशा मिट्टी से बनी मूर्ति का ही चयन करें। इससे जल प्रदूषण नहीं होता।
घर और कार्यस्थल के लिए अलग मूर्ति:
घर में स्थापना के लिए: दाहिनी ओर सूंड (Right Trunk) वाली मूर्ति को शुभ माना जाता है।
कार्यस्थल के लिए: बायीं ओर सूंड (Left Trunk) वाली मूर्ति अधिक लाभकारी होती है।
स्वयं मूर्ति बनाने की परंपरा: शास्त्रों में कहा गया है कि यदि आप स्वयं मिट्टी की मूर्ति बनाएं तो यह और भी पुण्यकारी माना जाता है। इसके लिए नदी किनारे की शुद्ध काली मिट्टी, पीली मिट्टी और भूसे का मिश्रण उपयोग करें।
गणेश जी के आसन और रंग का महत्व
बप्पा को विराजमान करने के लिए जिस आसन का चयन करें, वह भी शुभता को प्रभावित करता है।
पीला या हरा आसन सबसे शुभ: इन रंगों को समृद्धि और ऊर्जा का प्रतीक माना गया है।
काला रंग न रखें: काले रंग का उपयोग अशुभ फल देता है।
Ganesh Chaturthi 2025 पूजा सामग्री
पूजा में भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए निम्न वस्तुएं जरूर शामिल करें:
दूध, दही, घी, शहद, शक्कर
जनेऊ, हल्दी, चंदन, कुमकुम, अक्षत
पुष्प, फल, धूप, दीप, वस्त्र
दूर्वा (दूब घास): गणेश जी को दूर्वा चढ़ाने का विशेष महत्व है।
शमी के पत्ते और मोदक: मोदक गणेश जी का प्रिय भोग है।
गणेश पूजा के प्रमुख मंत्र और स्तोत्र
स्थापना के समय मंत्रों का उच्चारण अत्यंत फलदायी माना जाता है।
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ:
“वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥”
गणेश बीज मंत्र:
“ॐ गं गणपतये नमः” (108 बार जप करें)
अन्य पाठ: गणपति अथर्वशीर्ष, संकष्टनाशनम गणेश स्तोत्र, श्रीगणेश चालीसा का पाठ अवश्य करें।
दूर्वा चढ़ाने का महत्व और पौराणिक कथा
एक पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान गणेश ने अनलासुर नामक दैत्य का वध कर उसे निगल लिया था, तो उनके पेट में तीव्र जलन होने लगी। तब उन्हें दूर्वा (दूब घास) खिलाई गई, जिससे वह पीड़ा शांत हुई। तभी से गणेश पूजा में दूर्वा अर्पित करने की परंपरा चली आ रही है।
पूजा के समय रखें ये सावधानियां
पूजा के समय पीले वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है।
गणेश जी के दर्शन हमेशा सामने से ही करें, पीछे से नहीं, क्योंकि उनकी पीठ के पीछे दरिद्रता का वास माना जाता है।
गणेश जी को तुलसी पत्र अर्पित न करें।
यदि संभव हो तो कलश स्थापना भी करें।
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