
लखनऊ: बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय (BBAU) के शोधकर्ताओं के एक अध्ययन में गंगा और गोमती नदियों की मछलियों के शरीर में माइक्रोप्लास्टिक के कण पाए गए हैं। शोध में सामने आया है कि मछलियां इन बेहद छोटे प्लास्टिक कणों को निगल रही हैं, जिससे जलीय जीवन और खाद्य श्रृंखला पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर चिंता बढ़ गई है।
यह शोध ‘वॉटर, एयर एंड सॉयल पॉल्यूशन’ नामक अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हुआ है। शोध में BBAU समेत कई संस्थानों के शोधकर्ताओं ने हिस्सा लिया। BBAU के पर्यावरण विज्ञान विभाग के प्रोफेसर नरेंद्र कुमार भी इस शोध से जुड़े हैं।
शोधकर्ताओं ने लखनऊ की गोमती और कानपुर की गंगा नदी से एकत्र की गई विभिन्न प्रजातियों की मछलियों का अध्ययन किया। मछलियों के पाचन तंत्र और गलफड़ों की जांच कर यह पता लगाया गया कि उनके शरीर में कितने और किस प्रकार के माइक्रोप्लास्टिक मौजूद हैं।
मछलियों में सबसे ज्यादा मिले प्लास्टिक फाइबर
अध्ययन में पाया गया कि मछलियों में मिलने वाले माइक्रोप्लास्टिक में प्लास्टिक फाइबर सबसे आम थे। इनमें नीले रंग के कण सबसे अधिक पाए गए। शोधकर्ताओं ने पॉलीएथिलीन, पॉलीप्रोपाइलीन और PET जैसे प्लास्टिक के कण भी पाए। इनका इस्तेमाल पैकेजिंग, बोतल, कपड़े और कई घरेलू उत्पादों में किया जाता है।
माइक्रोप्लास्टिक आमतौर पर 5 मिलीमीटर से छोटे प्लास्टिक कण होते हैं। ये बड़े प्लास्टिक कचरे के टूटने से बन सकते हैं या सीधे पर्यावरण में पहुंच सकते हैं।
गलफड़ों की तुलना में पाचन तंत्र में ज्यादा कण
प्रोफेसर नरेंद्र कुमार के मुताबिक, अध्ययन में मछलियों के गलफड़ों की तुलना में पाचन तंत्र में अधिक माइक्रोप्लास्टिक कण मिले। इससे संकेत मिलता है कि मछलियां भोजन करते समय या प्रदूषित पानी निगलने के दौरान इन कणों को अपने शरीर में ले रही हैं।
शोधकर्ताओं को कुछ माइक्रोप्लास्टिक कणों की सतह पर धातु के कण भी मिले। इससे इन प्रदूषकों के खाद्य श्रृंखला के माध्यम से आगे पहुंचने की संभावित चिंता बढ़ गई है।
प्लास्टिक प्रदूषण पर जागरूकता की जरूरत
प्रोफेसर नरेंद्र कुमार ने कहा कि नदी में प्लास्टिक प्रदूषण केवल सतह पर दिखाई देने वाले कचरे तक सीमित नहीं है। छोटे-छोटे प्लास्टिक कण भी मछलियों और अन्य जलीय जीवों तक पहुंच रहे हैं।
शोधकर्ताओं ने नदियों और जलीय जीवन को प्लास्टिक प्रदूषण से बचाने के लिए प्लास्टिक के निपटान पर सख्ती, बेहतर कचरा प्रबंधन और लोगों में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत बताई है।

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