-भगत सिंह की जयंती पर ऑनलाइन मीटिंग में संघर्ष समिति ने लिया संकल्प
एलायंस टुडे ब्यूरो
लखनऊ। सार्वजनिक क्षेत्र में पावर सेक्टर को बचाये रखने के लिए बिजली कर्मी अन्तिम सांस तक संघर्ष करेंगे। रविवार को शहीद ए आजम भगत सिंह की जयंती पर ऑनलाइन मीटिंग में संघर्ष समिति ने यह संकल्प लिया।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उप्र ने भगत सिंह को श्रद्धा सुमन अर्पित कर कहा कि शहीदों के सपनों का भारत बनाने के लिए बिजली को सार्वजनिक क्षेत्र में
बनाए रखने के लिए बिजली कर्मी निर्णायक संघर्ष के लिये तैयार हैं और इसके लिए आखिरी सांस संघर्ष करेंगे।
समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि शहीद ए आजम भगत सिंह और अनेकों क्रांतिकारियों के बलिदान के बाद स्वतंत्रता मिली है। इतने बलिदानों के बाद मिली स्वतंत्रता के बाद जनता की परिसंपत्तियों को कुछ चुनिंदा निजी घरानों के हाथ कौड़ियों के मोल बेचना क्रांतिकारियों के साथ विश्वासघात है। संघर्ष समिति का इसके विरोध में संघर्ष जारी रहेगा।
संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि बिजली अकेली सेवा है जो अलग-अलग श्रेणी के उपभोक्ताओं को अलग-अलग दाम पर मिलती है। इसका उद्देश्य यही है कि बिजली सबकी आवश्यकता है और गरीबों को लगत से कम मूल्य पर बिजली देने के लिये ही आजादी के बाद बिजली को सार्वजनिक क्षेत्र में रखा गया था।
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र में गरीब उपभोक्ताओं को नुकसान उठाकर लागत से कम दाम पर बिजली आपूर्ति की जा रही है। दूसरी ओर कारपोरेट घरानों के लिए बिजली एक व्यापार है जबकि सार्वजनिक क्षेत्र के लिए बिजली एक सेवा है। इसीलिए बिजली के क्षेत्र में सब्सिडी और क्रॉस सब्सिडी का प्रावधान किया गया है।
संघर्ष समिति ने कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम व दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के अन्तर्गत प्रदेश के सबसे गरीब 42 जिले आते हैं। इन जिलों की बिजली कारपोरेट घरानों के हवाले कर देना प्रदेश के विकास के साथ सबसे बड़ा खिलवाड़ है।
संघर्ष समिति ने कहा कि निजीकरण के बाद बिजली की दरें कम से कम तीन गुनी बढ़ जायेंगी। पॉवर कारपोरेशन ने निजी घरानों को सहूलियत देने के लिए बिजली की दरों में 45 प्रतिशत तक का इजाफा करने का प्रस्ताव इसीलिए विद्युत नियामक आयोग को भेज रखा है। इस प्रस्ताव से ही घरेलू बिजली की दरें 13 रूपये प्रति यूनिट तक हो जायेंगी।
संघर्ष समिति ने कहा कि लगभग एक लाख करोड़ रुपए की परिसम्पत्तियों को मात्र 6500 करोड़ रुपए की रिजर्व प्राइस पर बेचने का आरएफपी डॉक्यूमेंट पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन ने तैयार किया है। इसके अतिरिक्त 42 जिलों की जमीन मात्र एक रुपए की लीज पर निजी घरानों को दी जायेगी।
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