

एलायंस टुडे ब्यूरो
बलिया। जिले के फेफना थाना क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां बारिश के पानी से भरे गहरे गड्ढे में गिरने से आठ वर्षीय मासूम की दर्दनाक मौत हो गई। मृतक की पहचान सत्यम के रूप में हुई है, जो अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। यह हादसा गुरुवार शाम को तब हुआ, जब वह अपने एक दोस्त के साथ घर के पास खेल रहा था। स्थानीय पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, सत्यम अपने घर के पास एक खुले स्थान पर खेल रहा था, जहां भारी बारिश के कारण एक गहरा गड्ढा पानी से लबालब भर गया था। खेल-खेल में सत्यम का पैर फिसल गया और वह सीधे उस गड्ढे में गिर पड़ा। पानी अधिक गहरा होने के कारण वह खुद को संभाल नहीं पाया और देखते ही देखते डूब गया।
दोस्त ने शोर मचाकर दी जानकारी, ग्रामीणों में मचा हड़कंप
सत्यम के साथ खेल रहा उसका दोस्त घटना से घबरा गया, लेकिन उसने तुरंत हिम्मत दिखाते हुए शोर मचाया और आसपास मौजूद लोगों को बुलाया। बच्चे की आवाज सुनकर गांववाले और सत्यम के परिजन मौके पर दौड़ पड़े। आनन-फानन में ग्रामीणों ने बच्चे को पानी से बाहर निकाला और उसे तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) ले जाया गया। हालांकि, डॉक्टरों ने जांच के बाद सत्यम को मृत घोषित कर दिया। बच्चे की मौत की खबर सुनते ही परिवार में कोहराम मच गया। मां-बाप का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं गांव में शोक की लहर फैल गई है। फेफना थाने के प्रभारी निरीक्षक (SHO) अजय कृष्ण त्रिपाठी ने बताया कि बच्चे के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और हादसे की जांच की जा रही है। परिजनों से घटना के बारे में विस्तृत जानकारी ली जा रही है। प्रारंभिक जांच में यह एक दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना प्रतीत होती है।
गांव के हालात पर उठे सवाल, प्रशासन से की गई कार्रवाई की मांग
इस घटना के बाद गांव में प्रशासन की लापरवाही को लेकर भी आक्रोश है। ग्रामीणों ने बताया कि बरसात के मौसम में गांव और उसके आसपास कई जगहों पर ऐसे गड्ढे पानी से भर जाते हैं, जो जानलेवा साबित हो सकते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इन गड्ढों की समय रहते भराई और बच्चों की सुरक्षा को लेकर कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से तत्काल प्रभाव से इन गहरे और खतरनाक गड्ढों को भरवाने और गांव में बच्चों की सुरक्षा के लिए जागरूकता अभियान चलाने की मांग की है। कई ग्रामीणों ने कहा कि यदि पहले ही ऐसे स्थानों को चिन्हित कर सुरक्षा उपाय किए गए होते, तो शायद आज सत्यम की जान बचाई जा सकती थी।
मासूम की मौत से टूट गया परिवार
सत्यम की असमय मृत्यु से उसका परिवार पूरी तरह से टूट चुका है। वह अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था, जिससे पूरे परिवार को ढांढस बंधाना मुश्किल हो गया है। गांव में हर किसी की आंखें नम हैं और लोग इस हादसे से गहरे सदमे में हैं।
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