
एलायंस टुडे ब्यूरो
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और आगामी वर्षों में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने की दिशा में एक ऐतिहासिक और रणनीतिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हाल ही में आयोजित राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि 1600 मेगावाट क्षमता की एक तापीय परियोजना से कुल 1500 मेगावाट बिजली की खरीद की जाएगी। यह खरीद DBFOO मॉडल के अंतर्गत बिडिंग प्रक्रिया के माध्यम से की जाएगी और 25 वर्षों तक चलेगी। इस बिडिंग प्रक्रिया में सबसे कम टैरिफ (5.38 रुपए प्रति यूनिट) की पेशकश करने वाली निजी कंपनी को परियोजना के लिए चुना गया है। इस समझौते से उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) को अनुमानतः 25 वर्षों में लगभग 2958 करोड़ रुपए की बचत होने की उम्मीद है।
क्या है DBFOO मॉडल?
DBFOO का पूरा नाम है Design, Build, Finance, Own and Operate। यह एक आधुनिक सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership – PPP) मॉडल है, जिसमें निजी कंपनियां एक पावर प्लांट की डिज़ाइन तैयार करती हैं, निर्माण करती हैं, वित्त की व्यवस्था करती हैं, स्वामित्व रखती हैं और उसे संचालित भी करती हैं। सरकार इन कंपनियों से पहले से तय टैरिफ पर बिजली खरीदने का दीर्घकालिक समझौता करती है। इस मॉडल के अंतर्गत सरकार को पावर प्लांट की स्थापना, रख-रखाव या पूंजी निवेश में कोई वित्तीय भार नहीं उठाना पड़ता, लेकिन राज्य को सुनिश्चित, स्थिर और अपेक्षाकृत सस्ती दर पर बिजली मिलती रहती है।
यूपी में सस्ती बिजली की दिशा में बड़ा कदम
योगी सरकार की इस योजना से वर्ष 2030-31 से उत्तर प्रदेश को 1500 मेगावाट बिजली बेहद सस्ती दर पर उपलब्ध होने लगेगी। यह प्रस्तावित परियोजना मौजूदा सरकारी व अन्य तापीय परियोजनाओं की तुलना में कहीं अधिक किफायती सिद्ध होगी। उदाहरण के लिए, जवाहरपुर, ओबरा, घाटमपुर, और पनकी जैसी परियोजनाओं से वर्तमान में 6.60 रुपए से 9 रुपए प्रति यूनिट तक बिजली मिल रही है। जबकि इस नई परियोजना के तहत वर्ष 2030-31 में बिजली केवल 6.10 रुपए प्रति यूनिट के दर पर प्राप्त होगी। ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने इस निर्णय की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि यह परियोजना उत्तर प्रदेश में ही स्थापित की जाएगी, और यही सरकार की प्रमुख शर्तों में शामिल था। इस परियोजना के लिए जुलाई 2024 में रिक्वेस्ट फॉर क्वालिफिकेशन (RFQ) जारी किया गया था, जिसमें 7 कंपनियों ने रुचि दिखाई थी। इनमें से 5 कंपनियों ने फाइनेंशियल बिड (RFP) प्रस्तुत की, और न्यूनतम टैरिफ प्रस्तुत करने वाली कंपनी को चयनित किया गया।
टैरिफ ब्रेकडाउन:
फिक्स्ड चार्ज: ₹3.727 प्रति यूनिट
फ्यूल चार्ज: ₹1.656 प्रति यूनिट
कुल टैरिफ: ₹5.38 प्रति यूनिट (जो अगले 25 वर्षों तक स्थिर रहेगा)
इस दर पर सरकार कंपनी के साथ पावर सप्लाई एग्रीमेंट (PSA) साइन करेगी।
सार्वजनिक संयंत्रों से भी सस्ती होगी यह बिजली
ऊर्जा मंत्री ने यह भी बताया कि यह डील न केवल पिछली बिडिंग्स और महाराष्ट्र जैसे अन्य राज्यों की तुलना में सस्ती है, बल्कि यूपी के सार्वजनिक संयंत्रों द्वारा दी जाने वाली बिजली से भी किफायती है। भविष्य में जब यह परियोजना चालू होगी, तब भी इसका टैरिफ 6.10 रुपए प्रति यूनिट से अधिक नहीं होगा।
ऊर्जा संकट से निपटने की दीर्घकालिक योजना
उत्तर प्रदेश में ऊर्जा की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए सरकार ने एक ठोस रणनीति बनाई है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) और उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) के अनुमान के अनुसार, राज्य को वर्ष 2033-34 तक लगभग 10,795 मेगावाट अतिरिक्त तापीय ऊर्जा की जरूरत होगी। इसके साथ ही, 23,500 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा (जैसे सौर व पवन) के लिए भी विस्तृत रोडमैप तैयार किया गया है। इन आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए DBFOO मॉडल के तहत यह बिडिंग प्रक्रिया शुरू की गई थी।
क्या होंगे लाभ?
दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा: 25 वर्षों तक सस्ती और स्थिर दर पर बिजली
राजकोषीय बचत: ₹2958 करोड़ की अनुमानित बचत
उद्योगों को राहत: सस्ती बिजली से औद्योगिक विकास को बल मिलेगा
घरेलू उपभोक्ताओं को फायदा: स्थिर आपूर्ति और किफायती दरें
