

नई दिल्ली: पंजाब के पठानकोट निवासी एक युवक को पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स के लिए कथित तौर पर जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि वह सेना और अर्धसैनिक बलों की गतिविधियों की लाइव फुटेज पाकिस्तान भेज रहा था।
पंजाब पुलिस ने गुरुवार को बताया कि प्रारंभिक जांच के अनुसार आरोपी की पहचान बलजीत सिंह के रूप में हुई है, जो पठानकोट के चक्क धारीवाल गांव का रहने वाला है। उसने कथित तौर पर राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर एक पुल के पास स्थित दुकान में CCTV कैमरा लगाया था, ताकि सेना और अर्धसैनिक बलों की आवाजाही पर नजर रखी जा सके।
पुलिस अधिकारियों ने PTI के हवाले से बताया कि आरोपी इस कैमरे की लाइव फीड पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स को भेज रहा था।
पूछताछ में कबूल किया जुर्म
गिरफ्तारी के बाद पूछताछ के दौरान आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने इसी साल जनवरी में NH-44 पठानकोट-जम्मू हाईवे पर स्थित एक दुकान में इंटरनेट आधारित CCTV कैमरा लगाया था।
पुलिस के अनुसार, बलजीत सिंह को दुबई में मौजूद एक अज्ञात व्यक्ति से निर्देश मिल रहे थे। इसके बदले उसे 40 हजार रुपये दिए गए थे।
अधिकारियों ने बताया कि आरोपी के कब्जे से CCTV कैमरा बरामद कर लिया गया है।
पिछले महीने भी पकड़े गए थे ISI समर्थित जासूसी मॉड्यूल
गौरतलब है कि पिछले महीने भी पुलिस ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI समर्थित दो जासूसी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया था। इन मामलों में चीन में बने हाई-टेक सोलर-पावर्ड CCTV कैमरों का इस्तेमाल संवेदनशील सैन्य ठिकानों की लाइव फुटेज पाकिस्तान भेजने के लिए किया जा रहा था।
एक मॉड्यूल को पंजाब के जालंधर में काउंटर इंटेलिजेंस विंग ने पकड़ा था। इस कार्रवाई में एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया और उसके पास से चीन में बना CCTV कैमरा, USB से जुड़ी सोलर प्लेट और 4G कनेक्टिविटी उपकरण बरामद किए गए।
दूसरे मॉड्यूल का खुलासा कपूरथला पुलिस ने एक केंद्रीय एजेंसी के साथ संयुक्त अभियान में किया था। इसमें दो लोगों को गिरफ्तार किया गया था। उनके पास से विदेशी हैंडलर्स से जुड़े चार मोबाइल फोन, एक SIM आधारित CCTV कैमरा और एक WiFi सेट बरामद किया गया था।
DGP ने बताया कैसे काम करते थे ये कैमरे
पंजाब के पुलिस महानिदेशक (DGP) गौरव यादव ने कहा कि ये मॉड्यूल रणनीतिक स्थानों पर SIM आधारित और सोलर-पावर्ड CCTV कैमरे लगा रहे थे, ताकि रक्षा प्रतिष्ठानों सहित संवेदनशील जगहों की निगरानी की जा सके और मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए लाइव फुटेज पाकिस्तान भेजी जा सके।
उन्होंने कहा की ये चीनी कैमरे ऑफ-ग्रिड निगरानी के लिए बेहद उपयुक्त हैं, क्योंकि ये 4G कनेक्टिविटी और सोलर पावर से चलते हैं। इन्हें पारंपरिक वायरिंग की जरूरत नहीं पड़ती।
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