
एलायंस टुडे ब्यूरो
लखनऊ। राजधानी में नगर निगम के बुलडोजर का असर दिखने लगा है. शनिवार शाम होते ही अधिवक्ताओं ने चैम्बर से अपने सामान को निकालकर दूसरी जगह शिफ्ट करने की तैयारी में शुरु करदी है, उनके साथ साथ लखनऊ सिविल कोर्ट के आसपास की दूकानों का भी यही हाल है.
बता दें की लखनऊ जिला कोर्ट के वकीलों के कई चैंबर्स की दीवारों पर 12 मई को नगर निगम ने लाल क्रॉस लगा दिए थें। इसके साथ ही नोटिस लगाया, जिसमें 16 मई तक का समय दिया गया था। कहा गया था कि अगर 16 तक ये अतिक्रमण नहीं हटाए गए तो 17 तारीख को प्रशासन खुद ही एक्शन लेगा। उस दौरान जो भी खर्च आएगा, उसका वहन अतिक्रमणकारी को करना होगा।
हाईकोर्ट में लखनऊ नगर निगम की ओर से दाखिल रिपोर्ट में बताया गया कि कोर्ट क्षेत्र में 72 अतिक्रमण चिह्नित किए गए हैं। इनमें अधिकांश वकीलों के चैंबर हैं। कुछ दुकानें भी हैं। अदालत ने इससे पहले भी नगर निगम को अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन, पुलिस बल पर्याप्त न होने पर कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी थी।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने आदेश दिया है कि तय तारीख 17 मई को नगर निगम ऐसे चैंबरों को अभियान चलाकर हटाए। इसके लिए प्रशासन पुलिस बल उपलब्ध कराएगा।
हाईकोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक मार्गों पर अवैध कब्जों से आम जनता को भारी परेशानी हो रही है, इसलिए इन्हें हटाने के लिए प्रभावी कार्रवाई जरूरी है। न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजीव भारती की खंडपीठ ने अनुराधा सिंह और दो अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया । हालांकि अधिवक्ताओं की ओर से इस कार्रवाई पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
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