

एलायंस टुडे ब्यूरो
लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के प्रस्ताव को तुरंत रद्द करने की मांग की है। समिति का कहना है कि जब योगी सरकार के पिछले आठ वर्षों में बिजली व्यवस्था में लगातार सुधार हुआ है, तो निजीकरण का कदम प्रदेश की ऊर्जा व्यवस्था को पटरी से उतारने का प्रयास है।
संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा में इस समय ‘विकसित भारत और विकसित उत्तर प्रदेश विजन-2047’ पर 24 घंटे की ऐतिहासिक चर्चा हो रही है। ऐसे में यह स्पष्ट करना जरूरी है कि विकसित उत्तर प्रदेश के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सस्ती, भरोसेमंद और गुणवत्तापरक बिजली की आवश्यकता है, जो केवल सार्वजनिक क्षेत्र में ही संभव है।
समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के समय प्रदेश की एटी एंड सी हानियां 42 प्रतिशत थीं, जो आज घटकर राष्ट्रीय मानक 15 प्रतिशत पर आ गई हैं। मई 2025 में उत्तर प्रदेश ने देश में सर्वाधिक विद्युत आपूर्ति का नया कीर्तिमान स्थापित किया, जबकि पहले यह रिकॉर्ड महाराष्ट्र के पास था। वर्तमान में प्रदेश में 3 करोड़ 63 लाख बिजली उपभोक्ता हैं, जो देश के किसी भी एक राज्य में सर्वाधिक हैं।
संघर्ष समिति ने सवाल उठाया कि जब बिजली व्यवस्था में इतने बड़े सुधार हुए हैं, तो फिर निजीकरण का औचित्य क्या है, खासकर तब जब पूर्वांचल और बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों की गरीब जनता सस्ती बिजली पर निर्भर है। पूर्वांचल में गरीबी पहले से अधिक है और बुंदेलखंड में पानी की गहराई इतनी नीचे है कि उसे ऊपर लाने के लिए बिजली आवश्यक है। निजीकरण इन क्षेत्रों के लोगों के लिए बिजली को महंगा और कम सुलभ बना देगा।
समिति ने आरोप लगाया कि निजीकरण के पीछे बड़ा घोटाला (मेगा स्कैम) है और इसमें पावर कॉरपोरेशन के शीर्ष अधिकारियों की निजी घरानों से मिलीभगत है। पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष आशीष गोयल ने नवंबर 2024 में लखनऊ में ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोसिएशन बनाई और उसके महामंत्री बने। इस एसोसिएशन में देश के बड़े कॉरपोरेट घराने शामिल हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य बिजली का निजीकरण है। समिति का कहना है कि अब जबकि निदेशक वित्त निधि नारंग का कार्यकाल बढ़ाने का प्रस्ताव सरकार ने अस्वीकार कर दिया है, तो इन अधिकारियों द्वारा तैयार किया गया निजीकरण का दस्तावेज तत्काल रद्द किया जाना चाहिए।
संघर्ष समिति के आह्वान पर निजीकरण के विरोध में यह आंदोलन लगातार 259वें दिन भी जारी रहा। 8 से 15 अगस्त तक तिरंगा लेकर अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में 14 अगस्त को सभी जिलों और परियोजनाओं में बिजली कर्मचारी तिरंगा रैली निकालेंगे और विरोध सभा करेंगे। राजधानी लखनऊ में शाम 4 बजे हाइडिल फील्ड हॉस्टल में सभा होगी, जिसमें लखनऊ के सभी कार्यालयों के बिजली कर्मचारी अपने-अपने कार्यालयों से तिरंगा यात्रा लेकर शामिल होंगे।
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