

एलायंस टुडे ब्यूरो
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण को लेकर विवाद और गहरा हो गया है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने मांग की है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण हेतु तैयार किए गए सभी दस्तावेज, विशेषकर ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025, को व्यापक जनहित में सार्वजनिक किया जाए। समिति ने आरोप लगाया है कि निजीकरण की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और इसमें कुछ चुनिंदा निजी घरानों और मीटर आपूर्तिकर्ता कंपनियों से मिलीभगत की आशंका है।
पूर्व विद्युत सचिव का बड़ा आरोप
इसी बीच, अटल बिहारी वाजपेई सरकार में विद्युत सचिव रहे पूर्व आईएएस अधिकारी ई ए एस शर्मा ने भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन को भेजे ईमेल में आश्चर्य जताया है कि पूर्व विद्युत सचिव आलोक कुमार के ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन से संबंध कैसे स्थापित हुए, जबकि यह सर्वविदित है कि यह एसोशिएशन निजीकरण और स्मार्ट मीटर आपूर्तिकर्ता कंपनियों की पैरवी करता है।
ई ए एस शर्मा ने अपने ईमेल में डिस्कॉम एसोशिएशन की फंडिंग की जांच की भी मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इसमें किन निजी घरानों का हित निहित है।
संघर्ष समिति का आरोप: प्रक्रिया अपारदर्शी, दस्तावेज छिपाए गए
संघर्ष समिति ने कहा कि योगी आदित्यनाथ सरकार में भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस नीति के बावजूद, उत्तर प्रदेश के 42 जिलों के विद्युत वितरण का निजीकरण अपारदर्शी तरीके से किया जा रहा है। समिति ने बताया कि ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति के समय यह स्पष्ट था कि ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2020 को आधार बनाया जाएगा, लेकिन अब अचानक ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 का उल्लेख किया जा रहा है, जो न तो सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध है, न ही इसे भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय की वेबसाइट पर डाला गया है, और न ही इस पर कोई आपत्ति या सुझाव मांगे गए हैं। समिति ने आशंका जताई कि इस नए दस्तावेज को कुछ चुनिंदा निजी घरानों के हित में तैयार किया गया है और इसमें ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की सक्रिय भूमिका रही है।
पारदर्शिता और जनहित की मांग
संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से तत्काल हस्तक्षेप करने और निजीकरण की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की मांग की है। समिति का कहना है कि लाखों करोड़ रुपये की सार्वजनिक संपत्तियों को निजी हाथों में देने से पहले सभी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं, ताकि उपभोक्ताओं और किसानों का विश्वास बना रहे।
प्रदेशभर में व्यापक विरोध प्रदर्शन
निजीकरण के विरोध में चल रहा बिजली कर्मियों का आंदोलन सोमवार को 271वें दिन पर पहुंच गया। इस मौके पर वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, मुरादाबाद, हरदुआगंज, जवाहरपुर, परीक्षा, पनकी, ओबरा, पिपरी और अनपरा समेत कई जिलों में जोरदार प्रदर्शन किया गया। संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि अगर दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किए गए और निजीकरण की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं हुई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
यह एलायंस टुडे का आधिकारिक न्यूज़ रूम (Digital Desk) है, जहां गुलजार वर्मा ( Gulzaar Verma ) जैसे पत्रकारों की एक अनुभवी टीम काम करती है जोकि ग्राउंड रिपोर्टिंग और विश्वसनीय स्रोतों से मिली सूचनाओं को जिम्मेदारी के साथ प्रोसेस करके जनहित की खबरें पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करती है.



