
नई दिल्ली: देश भर में प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई कथित अनियमितताओं को लेकर जारी विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक सरगर्मियों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा सौंपते हुए कहा कि यह उनके लिए किसी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है, बल्कि देश के युवाओं का भविष्य और राष्ट्रीय हित उनके लिए सर्वोपरि हैं।
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने आधिकारिक ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर एक भावुक और विस्तृत बयान साझा करते हुए अपने फैसले के कारणों को स्पष्ट किया।
अपने बयान की शुरुआत में उन्होंने कहा कि वे पिछले चार दशकों से अधिक समय से छात्रों, शिक्षकों और शिक्षा सुधारों के लिए समर्पित रहे हैं। उनका दृढ़ विश्वास है कि एक मजबूत, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा प्रणाली ही एक सशक्त राष्ट्र की नींव रखती है। उन्होंने प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में देश की सेवा करना उनके लिए सौभाग्य की बात रही।
शिक्षा मंत्री ने मई में आयोजित NEET-UG परीक्षा का जिक्र करते हुए कहा कि जैसे ही अनियमितताओं की बातें सामने आईं, सरकार ने तुरंत कड़े कदम उठाए:
पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच के लिए मामला सीबीआई को सौंपा गया।
परीक्षा रद्द कर पुन परीक्षा आयोजित की गई और आगामी वर्षों से इसे कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड में कराने का निर्णय लिया गया।
20 लाख से अधिक छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए ‘संपूर्ण सरकार’ (Whole-of-Government) दृष्टिकोण के तहत राज्यों और जिला प्रशासनों के सहयोग से 21 जून को पुनपरीक्षा का सफल संचालन कराया गया।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 16 जुलाई को घोषित परिणाम संतोषजनक रहे, जिनमें कई वंचित और मेधावी छात्रों को सफलता मिली।
धर्मेंद्र प्रधान ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि जब सरकार स्थिति को संभालने और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने में जुटी थी, तब भी जिम्मेदार पदों पर बैठे कुछ लोगों ने भ्रम फैलाने और व्यवधान पैदा करने का प्रयास किया।
उन्होंने कहा, मैं पहले दिन से ही अपनी जिम्मेदारी पर कायम रहा। मेरा संकल्प था कि ‘परीक्षा माफिया’ के कारण किसी भी मेधावी छात्र का नुकसान न हो। लेकिन जिस तरह से छात्रों को गुमराह करने की कोशिश की गई, उसने मुझे गहरी पीड़ा पहुँचाई है।
जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में चल रहे विरोध प्रदर्शनों का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने अपना इस्तीफा देने का फैसला कई महत्वपूर्ण कारणों से लिया है:
1. राष्ट्रविरोधी ताकतों को रोकना: ताकि असामाजिक या राष्ट्रविरोधी तत्व इस स्थिति का गलत फायदा न उठा सकें।
2. राष्ट्रीय एकता बनाए रखना: देश की शांति और सौहार्द को अक्षुण्ण रखना।
3 कानूनी जटिलताओं से बचाव: छात्रों का भविष्य अदालती और कानूनी प्रक्रियाओं में न उलझे।
4. पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करना: ताकि देश के युवा बिना किसी भ्रम के अपनी पढ़ाई और करियर पर ध्यान दे सकें।
राष्ट्र सेवा ही जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता
अपने बयान के अंत में धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री, मंत्रिपरिषद के साथियों और मंत्रालय के सभी अधिकारियों का धन्यवाद किया। उन्होंने दोहराया कि भारत की युवा शक्ति ही इस देश की वास्तविक ताकत है और वे जीवन भर राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित रहेंगे।
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