
एलायंस टुडे ब्यूरो
लखनऊ। प्रदेश के स्थानीय निकाय कर्मचारियों की वर्षों से लंबित मांगों को लेकर उत्तर प्रदेश स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। समस्याओं के समाधान में लगातार हो रही अनदेखी के विरोध में महासंघ पूरे प्रदेश के निकायों का दौरा कर रहा है और 9 अक्टूबर को लखनऊ में एक विशाल धरना-प्रदर्शन आयोजित करेगा।
इस प्रदर्शन में फिरोजाबाद और आगरा समेत प्रदेश भर के कर्मचारी शामिल होंगे। महासंघ की ओर से बताया गया कि यह आंदोलन उनकी 13 सूत्रीय प्रमुख मांगों के समर्थन में किया जा रहा है, जिनका समाधान वर्षों से लंबित है।
महासंघ का कहना है कि प्रमुख सचिव नगर विकास के स्तर पर 6 से 7 बार बैठकें की गईं, जिनमें समस्याओं के समयबद्ध निस्तारण के निर्देश स्थानीय निकाय निदेशक और संबंधित विभागीय अनुभागों को दिए गए थे। इसके अतिरिक्त, नगर विकास मंत्री द्वारा भी 2 से 3 बार प्रमुख सचिव को लिखित आदेश जारी किए गए, लेकिन बावजूद इसके कोई ठोस निर्णय या कार्रवाई आज तक नहीं हो पाई।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में वे आदेश शामिल हैं, जिन पर प्रदेश सरकार पहले ही निर्णय लेकर शासनादेश जारी कर चुकी है। अब केवल नगर विकास विभाग द्वारा उनके क्रियान्वयन की आवश्यकता है। इनमें कुछ आदेश तो पिछले 9 वर्षों से लंबित हैं। उदाहरण के तौर पर, 31 दिसम्बर 2001 तक कार्यरत दैनिक वेतनभोगी, संविदा और तदर्थ कर्मचारियों के नियमितीकरण का मामला अभी तक अधर में लटका हुआ है। इनकी संख्या पूरे प्रदेश में लगभग 352 है।
इसके अलावा, तदर्थ कर्मचारियों के विनियमतीकरण जैसे मुद्दे भी 4 वर्षों से केवल औपचारिकताओं तक सीमित हैं, जिन पर न नगर विकास विभाग ने गंभीरता दिखाई और न ही निदेशालय ने कोई ठोस कदम उठाया।
महासंघ ने स्पष्ट किया है कि यदि समय रहते उनकी मांगों पर कोई सार्थक निर्णय नहीं लिया गया तो यह आंदोलन आगे और उग्र रूप ले सकता है। महासंघ के पदाधिकारियों ने सरकार से अपील की है कि कर्मचारियों की जायज मांगों को नजरअंदाज करने की बजाय, जल्द समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।
9 अक्टूबर का यह धरना-प्रदर्शन स्थानीय निकाय कर्मचारियों की नाराजगी और उपेक्षा के खिलाफ एक बड़ा संदेश बन सकता है। सभी की निगाहें अब नगर विकास विभाग और सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।
