
लखनऊ: पुराने हाईकोर्ट परिसर और जिला कचहरी, कैसरबाग के आसपास बने अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ लखनऊ नगर निगम ने कार्रवाई तेज कर दी है। नगर निगम ने 30 अगस्त को ध्वस्तीकरण की तारीख तय की है। इसके तहत वकीलों के चैंबर, दुकानों और अन्य अस्थायी निर्माणों पर नोटिस चस्पा किए गए हैं।
नगर निगम ने 100 से अधिक कब्जाधारकों को नोटिस जारी कर 30 अगस्त तक स्वयं अतिक्रमण हटाने का अल्टीमेटम दिया है। तय समय तक कब्जा नहीं हटाने पर नगर निगम बुलडोजर से निर्माण ध्वस्त करेगा।
कार्रवाई की जद में पुराने हाईकोर्ट परिसर के आसपास लंबे समय से बने वकीलों के चैंबर भी हैं। नगर निगम का कहना है कि ये निर्माण सार्वजनिक भूमि पर किए गए अतिक्रमण के दायरे में आते हैं। वहीं, कई वकीलों का कहना है कि उनके चैंबर वर्षों पुराने हैं और वे लंबे समय से वहां मौजूद हैं।
पहले भी हो चुकी है चैंबर गिराने की कार्रवाई
लखनऊ के कैसरबाग इलाके में वकीलों के चैंबर हटाने को लेकर पहले भी विवाद हो चुका है। 17 मई को चैंबरों को गिराने की कार्रवाई के दौरान जिला अदालत के वकीलों और पुलिसकर्मियों के बीच झड़प हुई थी। यह कार्रवाई उच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत की जा रही थी।
अदालत में हुई सुनवाई के दौरान नगर निगम की ओर से बताया गया था कि इलाके में कई अवैध चैंबर और निर्माण हटाए जा चुके हैं। हालांकि, कुछ स्थानों पर दोबारा अतिक्रमण किए जाने की बात भी सामने आई है।
अब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
लखनऊ में वकीलों के चैंबर तोड़े जाने के नोटिस का मामला अब सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच गया है। बुलडोजर कार्रवाई से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान वकीलों ने अदालत को बताया कि उन्हें 30 अगस्त को चैंबर तोड़े जाने का नोटिस दिया गया है।
सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कहा कि चैंबर अवैध होंगे, जिस पर वकीलों की ओर से जवाब दिया गया कि वे वहां करीब 40 वर्षों से मौजूद हैं।
फिलहाल नगर निगम की ओर से 30 अगस्त की तारीख तय किए जाने के बाद वकीलों के चैंबरों पर बुलडोजर कार्रवाई को लेकर मामला गरमा गया है। अदालत में आगे की सुनवाई 10 सितंबर को होगी.

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