

एलायंस टुडे ब्यूरो
बेंगलुरु/कर्नाटक: मानसिक स्वास्थ्य संकट की बढ़ती गंभीरता को देखते हुए राजीव गांधी स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (RGUHS) ने मेडिकल छात्रों की आत्महत्याओं को रोकने के लिए एक अहम कदम उठाया है। अब कर्नाटक के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेज हॉस्टलों में छत के पंखों पर “एंटी-सुसाइड डिवाइस” लगाए जाएंगे। यह फैसला मांड्या इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (MIMS) में महज पांच दिनों में दो छात्रों की आत्महत्या के बाद लिया गया है।
पांच दिन में दो छात्र आत्महत्या के शिकार
30 जुलाई को कोप्पल जिले के रहने वाले भारत, जो कि MIMS में मेडिकल के छात्र थे, अपने हॉस्टल के कमरे में मृत पाए गए, इसके कुछ ही दिन बाद, 2 अगस्त को निश्कला, जो बीएससी नर्सिंग की अंतिम वर्ष की छात्रा थीं, ने भी आत्महत्या कर ली। इन दुखद घटनाओं के बाद RGUHS की करिकुलम डिवेलपमेंट सेल के प्रमुख डॉ. संजीव ने MIMS का दौरा किया और छात्रों की मानसिक स्थिति व हॉस्टल व्यवस्थाओं का मूल्यांकन किया।
कैसे काम करता है एंटी-सुसाइड डिवाइस
यह विशेष डिवाइस सीलिंग फैन में लगाया जाएगा और यह वजन की एक तय सीमा से अधिक भार पड़ते ही स्वतः पंखे को डिसकनेक्ट कर देता है। साथ ही, इसमें एक अलार्म सिस्टम भी होता है जो तुरंत हॉस्टल स्टाफ को सूचित करता है।इस तकनीक का पायलट परीक्षण पहले ही MIMS में किया जा चुका है, और शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, यह डिवाइस आत्महत्या की कोशिशों को रोकने में प्रभावी साबित हो सकती है।
मानसिक स्वास्थ्य संकट की चेतावनी
इन आत्महत्याओं ने मेडिकल शिक्षा की कठोर सच्चाई को उजागर किया है – अत्यधिक शैक्षणिक दबाव, तनाव, अकेलापन और मानसिक स्वास्थ्य सहायता की कमी। इस डिवाइस को लगाना एक राहत भरा कदम है, लेकिन यह केवल घटना के बाद की प्रतिक्रिया है। जरूरत है ऐसे प्रभावी और सक्रिय उपायों की, जो छात्रों को पहले ही मदद दे सकें।
तकनीकी समाधान से आगे बढ़ने की जरूरत
भले ही पंखों में एंटी-सुसाइड डिवाइस आत्महत्याओं को रोकने में मददगार हो, लेकिन यह मानसिक स्वास्थ्य के लिए दीर्घकालीन समाधान नहीं है। RGUHS सहित सभी विश्वविद्यालयों को चाहिए कि वे प्रशिक्षित काउंसलरों की नियुक्ति करें,मेंटल हेल्थ वर्कशॉप आयोजित करें,छात्रों के लिए सपोर्ट नेटवर्क तैयार करें, समय पर सलाह और चिकित्सा परामर्श उपलब्ध कराएं
मानवता से होगा सच्चा समाधान
तकनीकी उपाय जीवन बचा सकते हैं, लेकिन छात्रों को सच्ची मदद की ज़रूरत भावनात्मक सहारे और संवेदनशीलता से होती है। हॉस्टल में पंखे का डिवाइस लगाना ज़रूरी है, लेकिन उससे भी ज़रूरी है कि छात्रों को लगे कि वे अकेले नहीं हैं, उनके पास सुनने और समझने वाला कोई है।
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